जगदलपुर- 25-26 सितंबर को बस्तर में आई बाढ़ ने चारों दिशाओं में तबाही मचाकर रखी. कई लोगों का आशियाना उजड़ गया. कई लोग अपने घर से बेघर हो गए. कई लोग रात के अंधेरे में ओस की बूंदो के बीच छत में रात गुजारने को मजबूर हो गए. इन सब के बीच लाखों हेक्टेयर में लगाए गए किसानों के फसल भी बर्बाद हो गए. बर्बादी को लेकर किसानों के चेहरे मायूस हो गए हैं. और अब सरकार से उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. आज इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के साथ मिलकर सैकड़ो किसानों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है. और खराब फसल पर उचित मुआवजा व ऋण माफी की मांग की है.
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने बताया कि बस्तर में आई बाढ़ ने किसानों की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है. नदी के किनारे व बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब लाखों हेक्टेयर भूमि पर लगा फसल बर्बाद हो चूका हैं. किसान बेघर स्थिति में है. कर्ज लेने के बाद किसानों के मानसिक दबाव काफी बढ़ रहा है. समर्थन मूल्य में प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की बिक्री की जाती है. जिसकी कीमत करीब 65100 होती है. इसी आधार पर सरकार को मुआवजा राशि देना चाहिए. और तत्काल ऋण को माफ कर देना चाहिए. सरकार से मांग की जिला प्रशासन के अधिकारियों से विधिवत निरीक्षण करवाने के बाद 65100 प्रति एकड़ मुआवजा राशि सरकार की मांग सरकार से है.
इंद्रावती नदी बचाव समिति के जिला अध्यक्ष पूरन कश्यप का कहना है कि उड़ीसा सरकार ने साजिश के साथ बस्तर को मुश्किल हालात में डालने के लिए खातीगुडा डैम से गेट खोलकर पानी को बिना सूचना के छोड़ दिया गया. जिससे बस्तर पूरी तरह डूब गया. बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई. और किसानों का फसल बर्बाद हो गया. गर्मी के मौसम में जब बस्तरवासी इंद्रावती नदी सूख जाने को लेकर आंदोलन कर रहे थे. और उड़ीसा सरकार से मांग करते थे कि वह डैम से पानी छोड़ दे, लेकिन उस समय पानी नहीं छोड़ा गया और अब मुश्किल घड़ी में पानी छोड़कर बस्तर को और भी मुश्किल में डाल दिया. इसके अलावा एनएमडीसी स्टील प्लांट नगरनार का गंदा पानी भी छोड़ दिया गया. गंदा पानी की वजह से धान की ऊपरी सतह पर लोहा पानी जम गया. और फसल बर्बाद हो गया. इसके लिए MLA और MP से भी मिलकर ख़राब फसल को दिखाकर उचित कार्रवाई की मांग करेंगे.