जगदलपुर- गरीबों के पेट तक पहुंचने वाले सरकारी चावल पर आखिर किसकी नजर है? जिस अनाज को सरकार गरीब परिवारों के लिए भेजती है, अगर वही अनाज गोदाम से राशन दुकान तक पहुंचते-पहुंचते कम होने लगे, तो सवाल उठना लाजिमी है. बस्तर में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां 50 क्विंटल चावल की खेप में 2 क्विंटल चावल कम मिलने का आरोप लगा है. यानी गरीबों के हिस्से का करीब 200 किलो चावल आखिर कहां गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
धरमपुरा राशन दुकान संचालक बाजपेयी के मुताबिक 27 अक्टूबर को FCI गोदाम से उनकी दुकान के लिए 50 क्विंटल चावल का भंडारण किया गया था. कुल 100 बोरे चावल दुकान पहुंचे. लेकिन जब नापतौल की गई तो करीब 2 क्विंटल चावल कम पाया गया. खास बात यह है कि नापतौल के दौरान वार्ड के 4 से 5 लोग भी मौजूद थे. जिन्होंने चावल की कमी को अपनी आंखों से देखा. संचालक ने तत्काल इसकी जानकारी जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम राठौर और खाद्य निरीक्षक पायल वर्मा को दी. अब इस कमी का खामियाजा उन गरीब परिवारों को भुगतना पड़ सकता है, जो हर महीने अपने राशन के भरोसे रहते हैं. संचालक का कहना है कि 2 क्विंटल चावल कम होने से करीब 6 से 7 परिवारों को उनके हिस्से का राशन नहीं मिल पाएगा. राशन लेने पहुंचने वाले हितग्राही जब खाली हाथ लौटेंगे, तो उनका गुस्सा दुकान संचालक पर निकलेगा.
यह मामला सिर्फ 2 क्विंटल चावल का नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है, जिसके जरिए सरकार गरीबों तक अनाज पहुंचाने का दावा करती है. बस्तर जिले में 485 पीडीएस दुकानें संचालित हैं. करीब 2 लाख 10 हजार राशनकार्डधारियों के माध्यम से लगभग 8 लाख लोग इस व्यवस्था पर निर्भर हैं. और लगभग सभी राशन दुकानों में राशन सामग्री कम पहुंचती है.
इधर 1 नवंबर से राशन वितरण प्रभावित होने की बात भी सामने आई है. ऐसे में गरीब परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है. अब खाद्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि FCI गोदाम से लेकर परिवहन और राशन दुकान तक चावल की पूरी सप्लाई चेन का हिसाब खंगाले. सबसे बड़े सवाल ये हैं कि 50 क्विंटल चावल में 2 क्विंटल की कमी कैसे आई? क्या गोदाम से ही कम चावल जारी हुआ, परिवहन के दौरान अनाज कम हुआ या फिर कहीं और गड़बड़ी हुई? अगर एक दुकान में चावल कम पहुंचा है, तो क्या जिले की बाकी 484 दुकानों की भी जांच होगी?
गरीबों के हिस्से का राशन कोई खैरात नहीं, उनका अधिकार है. इस अधिकार में सेंध लगाने वालों की पहचान कर जवाबदेही तय करना जरूरी है. क्योंकि चावल की हर बोरी का हिसाब होना चाहिए और गरीबों के निवाले से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए.
