आदिवासी युवाओं की आवाज को मिला नया मंच, आदिवासी आवाज प्रशिक्षण में 55 प्रतिभागियों ने सीखे डिजिटल मीडिया के गुर

जगदलपुर- भतरा समाज विकास परिषद भवन में आदिवासी लाइव्स मैटर द्वारा आयोजित नि:शुल्क तीन दिवसीय आवासीय “आदिवासी आवाज प्रशिक्षण” कार्यक्रम का सफल समापन गुरुवार को हुआ. 9 से 11 जून तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा से आए लगभग 55 आदिवासी युवाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी युवाओं को मीडिया, संचार और डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर उन्हें अपने समाज, संस्कृति और मुद्दों को आदिवासियत के दृष्टिकोण से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए सशक्त बनाना था. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्टोरीटेलिंग, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग, आर्टिकल राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई. प्रशिक्षण की शुरुआत आदिवासी लाइव्स मैटर के प्रोजेक्ट मैनेजर नितेश महतो के परिचय सत्र से हुई. उन्होंने आदिवासियत, सामुदायिक पहचान और उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी कहानियों को स्वयं सामने लाने के लिए प्रेरित किया. साथ ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विशेषताओं और उनके प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी साझा की.

वहीं, कम्युनिकेशन मैनेजर राहुल हेम्ब्रम ने प्रतिभागियों को प्रभावी स्क्रिप्ट राइटिंग और कहानी लेखन की बारीकियों से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि मजबूत और संवेदनशील स्क्रिप्ट किसी भी सामाजिक मुद्दे को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने की नींव होती है. प्रशिक्षण के दौरान योगेश नरेटी और अनुभव शोरी ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर संवाद करते हुए प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए. इन चर्चाओं ने युवाओं को समाज के विभिन्न पहलुओं को समझने और संवेदनशीलता के साथ उसकी कहानियों को प्रस्तुत करने की नई दृष्टि प्रदान की. इसके अलावा तुमलेश नेटी ने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, पोस्टर मेकिंग, डिजिटल डिजाइनिंग और प्रभावी कंटेंट प्रस्तुति के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया. वहीं नीलिमा शोरी, अभिचंद नेताम और आदिवासी लाइव्स मैटर की छत्तीसगढ़ स्टेट कोऑर्डिनेटर कविता कश्यप ने पूरे कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए प्रतिभागियों को निरंतर सहयोग प्रदान किया.

 

 

 

 

 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को सात दिवसीय विशेष चैलेंज दिया गया. इसके तहत उन्हें लगातार सात दिनों तक किसी आदिवासी मुद्दे पर वीडियो कंटेंट तैयार करना होगा. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आदिवासी लाइव्स मैटर द्वारा अन्य राज्यों के शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाएगा. इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के 10 जिलों के अलावा महाराष्ट्र और ओडिशा से आए युवाओं की सक्रिय सहभागिता रही. लगभग 55 आदिवासी युवाओं की भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम क्षेत्रीय स्तर पर आदिवासी युवाओं के लिए संवाद, सीखने, नेतृत्व विकास और नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा. आदिवासी लाइव्स मैटर की इस पहल को आदिवासी समुदायों की आवाज को डिजिटल माध्यमों के जरिए सशक्त बनाने और नई पीढ़ी को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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