करपावंड के जंगलों में लकड़ी तस्करों का राज? दिन-दहाड़े कट रहे पेड़, विभागीय मिलीभगत के आरोप….

जगदलपुर- करपावंड वन परिक्षेत्र में जंगलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्षेत्र के कई गांवों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि वन क्षेत्रों में बहुमूल्य वृक्षों की अवैध कटाई धड़ल्ले से जारी है. हैरानी की बात यह है कि तस्कर रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन-दहाड़े जंगलों में पहुंचकर पेड़ों की कटाई कर रहे हैं. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले लकड़ी तस्करों का एक संगठित नेटवर्क इस पूरे खेल को संचालित कर रहा है. कटाई के बाद लकड़ियों को छोटे वाहनों और अन्य माध्यमों से जंगल से बाहर निकाल लिया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तस्करों की गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वन विभाग के पास सुरक्षा तंत्र, गश्ती दल और निगरानी की जिम्मेदारी है, तब भी तस्कर बेखौफ होकर जंगलों में कैसे प्रवेश कर रहे हैं? सूत्रों के अनुसार विभाग के अधिकारी- कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. आरोप है कि अंदरूनी सूचना और संरक्षण के कारण तस्करों को कार्रवाई से पहले ही खबर मिल जाती है, जिससे वे आसानी से बच निकलते हैं. वहीं कई बार वन विभाग के लोग तस्करों तक पहुंचकर उन्हें छोड़ देते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में लगातार कटाई हो रही है, वहां वन विभाग के अधिकारियों का नियमित निरीक्षण होता है. परिणामस्वरूप वन संपदा का नुकसान बढ़ता जा रहा है.

अब स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं उच्च वन अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध कटाई में शामिल तस्करों के नेटवर्क का पर्दाफाश करने व यदि विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

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