बीजापुर. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के विशेष महानिदेशक दीपक कुमार ने बीजापुर रेंज के घोर संवेदनशील कोर सिक्योरिटी ऑपरेशनल जोन का सघन दौरा किया. बीते कल सोमवार को हुए इस महत्वपूर्ण दौरे में उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, जवानों के मनोबल और नक्सल विरोधी अभियानों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया. इस दौरान उनके साथ छत्तीसगढ़ सेक्टर के महानिरीक्षक शालिन और बीजापुर ऑप्स रेंज के उप महानिरीक्षक बी. एस. नेगी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे, जिनके साथ उन्होंने विभिन्न इकाइयों और परिचालनिक ठिकानों का बारीकी से निरीक्षण किया.
विशेष महानिदेशक ने अपने दौरे की शुरुआत 222 बटालियन के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस पेड़्डाकोरमा से की, जो क्षेत्र कभी माओवादियों का सबसे मजबूत गढ़ और पश्चिम बस्तर डिवीजन का मुख्य ठिकाना माना जाता था. अत्यंत चुनौतीपूर्ण और विपरीत परिस्थितियों में इस FOB की स्थापना करने और इसे सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए उन्होंने अधिकारियों व जवानों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने बल के योगदान की प्रशंसा करते हुए जवानों को कड़ा संदेश दिया कि क्षेत्र के नक्सल मुक्त घोषित होने के बावजूद सभी बल सदस्यों को लगातार सतर्कता, कड़ा अनुशासन और परिचालनिक सजगता बनाए रखनी होगी.
इसके उपरांत विशेष महानिदेशक ने 85 बटालियन मुख्यालय का दौरा कर पूरे परिसर का निरीक्षण किया और जवानों से बातचीत कर उनकी प्रशासनिक व परिचालन तैयारियों की जानकारी ली. उन्होंने वहां विभिन्न कल्याणकारी व प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के साथ ही परिसर में स्थित के-9 केयरिंग सेंटर का भी विशेष रूप से निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने स्निफर डॉग्स की देखभाल, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य प्रबंधन में जुटे डॉक्टरों और स्टाफ के समर्पित प्रयासों की जमकर तारीफ की.

दौरे के अगले चरण में शाम के वक्त उन्होंने 229 बटालियन मुख्यालय का भ्रमण किया और फिर एनटीएस घाटी पहुंचे, जहां वर्तमान में प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है. इस ट्रेनिंग कैंप में बीजापुर रेंज की 10 अलग-अलग परिचालन इकाइयों में तैनात होने वाले कुल 446 प्रशिक्षु अधिकारी और जवान कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं. इन प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए विशेष महानिदेशक ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में ट्रेनिंग के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि बस्तर के घने जंगलों तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए उच्च स्तरीय शारीरिक क्षमता, सामरिक दक्षता, परिस्थितिजन्य जागरूकता और जंगल युद्ध कौशल अत्यंत आवश्यक हैं. उन्होंने सभी जवानों से इस प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाने और सीखे गए कौशलों का भविष्य की चुनौतियों में प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया.