जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ में ज़मीन, मकान और प्लॉट की सरकारी दरों (कलेक्टर गाइडलाइन) में 10% से 300% तक की अप्रत्याशित वृद्धि लागू होते ही पूरे प्रदेश में भूचाल आ गया है. इस तीखे संशोधन ने आम जनता, ज़मीन कारोबारियों और रियल एस्टेट उद्योग में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है, जिसके चलते पंजीयन कार्यालयों में अचानक सन्नाटा और लेन-देन में भारी मंदी छा गई है.
रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि और वित्तीय बोझ
सरकार द्वारा घोषित नई दरों ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ज़मीन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है. कई जिलों में यह वृद्धि 150% से 300% तक दर्ज की गई है.
महंगा हुआ घर का सपना : गाइडलाइन दरें बढ़ने से रजिस्ट्री शुल्क, स्टांप ड्यूटी और अन्य पंजीयन औपचारिकताएँ कई गुना महंगी हो गई हैं.
बाजार मूल्य से ऊपर सरकारी दर : विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े शहरों के कई इलाकों में दस्तावेजी मूल्य अब वास्तविक बाजार मूल्य से भी ऊपर पहुँच गया है, जिससे ज़मीन खरीदने वालों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है.
रियल एस्टेट सेक्टर और आम जनता का आक्रोश
जमीन कारोबारियों और डेवलपर्स ने इस फैसले को “जनविरोधी, अव्यावहारिक और आर्थिक रूप से दमनकारी” करार दिया है. उनका मुख्य आरोप है कि सरकार ने क्षेत्रीय आर्थिक स्थिति और क्रय क्षमता का आकलन किए बिना एकतरफा फैसला लिया है, जिससे बाज़ार का संतुलन बिगड़ गया है.
बस्तर क्षेत्र में मुखर विरोध
जगदलपुर में ज़मीन कारोबारियों और रियल एस्टेट डेवलपर्स ने बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बैठक कर विरोध व्यक्त किया है. उनका कहना है कि इस उछाल से गरीब, आदिवासी और निम्न आय वर्ग के लिए पुश्तैनी ज़मीन का हस्तांतरण करना या घर बनाना लगभग असंभव हो जाएगा.
चेंबर की चेतावनी
व्यापारियों ने सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दरें कम नहीं की गईं, तो प्रदेश की ज़मीन बाजार प्रणाली लंबे समय के लिए ठप (Stagnant) हो सकती है. बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स इस मुद्दे को 29 नवंबर को रायपुर में होने वाली प्रदेश स्तरीय चेंबर बैठक में प्रमुखता से उठाएगा.
राजस्व संग्रह पर उल्टा असर !
विपक्षी दलों ने इस वृद्धि को आर्थिक संकट का संकेत बताते हुए दावा किया है कि भूमि पंजीयन में भारी गिरावट आएगी, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ने के बजाय उल्टा कम हो सकता है. रियल एस्टेट उद्योग गहरे अवसाद में जा सकता है और इससे जुड़ी हजारों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है.
विपक्षी आरोप : “सरकार ने यह नीति केवल राजस्व संग्रह बढ़ाने के उद्देश्य से लाई है, जिसमें आम लोगों की आर्थिक क्षमता को पूरी तरह से अनदेखा किया गया है.”
सरकार का दावा बनाम जमीनी हकीकत
हालाँकि सरकारी पक्ष का तर्क है कि नई गाइडलाइन से भविष्य में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को उचित और वास्तविक मुआवजा मिल सकेगा, लेकिन आम जनता और विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता का यह दावा तभी सार्थक होगा जब दरें लोगों की क्रय क्षमता के अनुरूप निर्धारित की जाएँ.
बाज़ार में ठहराव स्पष्ट दिखाई दे रहा है. बिल्डरों और खरीदारों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द दरों में राहत देनी होगी, अन्यथा इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ेगा, और विरोध प्रदर्शन और तेज़ी पकड़ सकते हैं.