NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जानें शुरुआत से अब तक की पूरी कहानी

नई दिल्ली (सूत्र). देशभर में नीट परीक्षा की अनियमितताओं को लेकर जारी भारी छात्र आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए कहा कि वे देश के युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला ले रहे हैं.

​इस पूरे विवाद की शुरुआत 3 मई को नीट-यूजी की परीक्षा आयोजित होने के तुरंत बाद हुई, जब धांधली और पेपर लीक की खबरें सामने आने लगीं. इसके बाद छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए. जून की शुरुआत से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले कॉकरोच जनता पार्टी जैसे युवा संगठनों और छात्र संघों ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक प्रमुखता से उठाया. यह आंदोलन 20 जुलाई को उस समय और उग्र हो गया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवाओं का जमावड़ा हुआ. संसद मार्च और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन दिल्ली से निकलकर मुंबई समेत देश के कई अन्य प्रमुख शहरों में फैल गया.

​दूसरी तरफ, शिक्षा मंत्री ने अपने इस्तीफे के साथ ही सरकार का पक्ष भी स्पष्ट रखा. उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू से ही पारदर्शी रवैया अपनाया था. धांधली की शिकायतें मिलते ही केंद्र सरकार ने मामले की जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और पुन: परीक्षा का आयोजन कराया.

मंत्रालय ने यह भी फैसला लिया कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत अगले साल से नीट परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी. धर्मेंद्र प्रधान का कहना था कि 16 जुलाई को घोषित पुन: परीक्षा के नतीजे संतोषजनक रहे, लेकिन विरोध प्रदर्शनों के बीच स्थिति का गलत फायदा उठाए जाने और छात्रों का समय कानूनी उलझनों में नष्ट होने से बचाने के लिए उन्होंने पद छोड़ना ही उचित समझा.

​इस्तीफे के बाद छात्र नेताओं और विपक्ष की ओर से भी त्वरित प्रतिक्रियाएं आईं. CJP और प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने इस कदम को छात्र शक्ति की बड़ी जीत करार दिया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रभावित परिवारों को मुआवजा और अन्य प्रशासनिक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी भावी रणनीति तय करते रहेंगे. वहीं विपक्षी दलों ने इसे जन-दबाव का नतीजा बताते हुए मांग की कि पूरे परीक्षा ढांचे और धांधली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए. फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा जंतर-मंतर क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

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