जगदलपुर. जिले के धुरगुड़ा स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं और हॉस्टल के खाने में कीड़े मिलने जैसी गंभीर समस्याओं से परेशान होकर जब सैकड़ों छोटे-छोटे छात्र अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, तो जगदलपुर के एसडीएम मनीष वर्मा का एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील रूप देखने को मिला. कलेक्ट्रेट परिसर में छात्रों के पहुंचने की भनक लगते ही एसडीएम मनीष वर्मा बिना एक पल भी गंवाए, अपने सहयोगियों के साथ तुरंत कार्यालय से बाहर निकलकर सीधे बच्चों के बीच पहुंच गए.
नन्हें-मुन्हें बच्चों की तकलीफ और प्यास को भांपते हुए एसडीएम साहब ने सबसे पहले संवेदनशीलता का परिचय दिया और तत्काल सभी बच्चों के लिए बिस्किट तथा पीने के पानी की व्यवस्था करवाई. बच्चों को बिस्किट और पानी देकर उनका हाल-चाल पूछते हुए उन्होंने पूरी आत्मीयता से उनकी एक-एक बात और शिकायत को ध्यानपूर्वक सुना.
छात्रों द्वारा शिक्षकों की बार-बार बर्खास्तगी, बिजली-पानी की समस्या और धमकियों के आरोपों पर एसडीएम ने उन्हें पूर्ण विश्वास में लिया. उन्होंने बच्चों को ढांढस बंधाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन भी जिम्मेदार कर्मियों या अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगे हैं, उन्हें पहले सख्त चेतावनी और समझाइश दी जाएगी. यदि इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आता है और स्थिति नहीं बदलती, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने खुद हर सप्ताह विद्यालय जाकर औचक निरीक्षण करने का वादा भी किया.
समस्याओं का समाधान करने के बाद एसडीएम मनीष वर्मा ने छात्रों के साथ एक अभिभावक और सच्चे मार्गदर्शक की भूमिका निभाई. उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए अपने जीवन का अनुभव साझा किया और बताया कि वे खुद भी इसी तरह कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर और कड़ी मेहनत के बल पर इस पद तक पहुंचे हैं. उन्होंने छात्रों को भविष्य की परीक्षाओं की तैयारी करने के तरीके, पढ़ाई की रणनीति और विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने का बेहतरीन गुरुमंत्र दिया.
एसडीएम मनीष वर्मा के इस आत्मीय व्यवहार, त्वरित निर्णय, बिस्किट-पानी से मिले सम्मान और प्रेरणादायी मार्गदर्शन से कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों का आक्रोश पल भर में खुशी में बदल गया. परिसर में मौजूद बच्चों के चेहरों पर एक नया आत्मविश्वास और हर्ष साफ दिखाई देने लगा. छात्रों को न केवल अपनी समस्याओं के हल का भरोसा मिला, बल्कि एक बड़े अधिकारी से मिला यह मार्गदर्शन उनके जीवन के लिए एक यादगार सीख बन गया.