सहकारिता पर उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन, आगामी पांच वर्षों के रणनीतिक रोडमैप, पैक्स विस्तार और जिला मॉडल्स पर हुआ गहन मंथन…..

जगदलपुर- सहकारिता क्षेत्र को धरातल पर अधिक सशक्त व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बस्तर के जगदलपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन सहकार से समृद्धि का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में आगामी पांच वर्षों के रणनीतिक रोडमैप, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के विस्तार और जिला स्तर पर सफल मॉडल्स पर व्यापक चर्चा हुई. सम्मेलन के आरंभिक सत्र में नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा अगले पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग की रूपरेखा साझा की गई. इस सत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित लक्ष्यों, प्रस्तावित पहलों और वित्तीय सहायता के साथ-साथ उत्कृष्ट कार्यों पर केंद्रित वीडियो और प्रश्नोत्तर सत्र के जरिए परिचर्चा को आगे बढ़ाया गया.

इसके पश्चात आयोजित सत्र में कृषि क्षेत्र में पैक्स की सीधी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया. पंजाब के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में इफको, इफको-एमसी, कृभको और आईपीएल ने अपनी प्रस्तुतियां दीं. इसमें किसानों तक सीधे उर्वरक पहुंचाने, नई पैक्स समितियों के गठन तथा कीटनाशक व्यापार में पैक्स की भूमिका को मजबूत करने से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विमर्श हुआ. जमीनी स्तर पर सहकारिता के विकास को प्रदर्शित करने वाले विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव व पुडुचेरी ने अपने-अपने श्रेष्ठ जिला स्तरीय मॉडल्स प्रस्तुत किए.

सम्मेलन के समापन सत्र को भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने संबोधित किया. उन्होंने बैठक के प्रमुख कार्यबिंदुओं का संकलन प्रस्तुत करते हुए राज्यों से अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तुरंत व्यावहारिक एक्शन प्लान तैयार करने का आह्वान किया. डॉ. भूटानी ने बताया कि अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 95 हजार रूपए नई पैक्स के गठन का लक्ष्य है. जो जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की वित्तीय मजबूती की आधारशिला बनेगा. इसके साथ ही उन्होंने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए नाबार्ड द्वारा तैयार किए जा रहे साझा कोर बैंकिंग सॉल्यूशन प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, पैक्स कंप्यूटरीकरण, ऑडिट कार्यों के समयबद्ध निपटान, विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण और डेयरी क्षेत्र के एकीकरण पर भी जोर दिया. इस महत्वपूर्ण विमर्श के उपरांत प्रतिभागियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के समन्वय से पैक्स, लघु वनोपज सहकारी समितियों और जनजातीय सहकारी समितियों का अध्ययन दौरा भी आयोजित किया गया. सहकारिता सचिव ने घोषणा की कि समीक्षा की इस श्रृंखला का अगला सम्मेलन आगामी जनवरी माह में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित किया जाएगा.

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सहकारिता तमिलनाडु पी. अमुधा, अतिरिक्त सचिव सहकारिता भारत सरकार पंकज बंसल, संयुक्त सचिव सहकारिता भारत सरकार सिदार्थ जैन, सचिव सहकारिता छत्तीसगढ़ शासन डॉ.सीआर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाए छत्तीसगढ़ रमेश कुमार शर्मा सहित विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिवों और पंजीयकों तथा विभिन्न सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.

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