बस्तर- बस्तर से लगे पड़ोसी राज्य उड़ीसा के कोरापुट में स्थानीय आदिवासियों की भाषा बोली और कल्चर पर बनी एक फिल्म बीते दिनों उड़ीसा राज्य के अलग-अलग जिलों में रिलीज हुई है. कोरापुट और बस्तर का कल्चर एक दूसरे से जुड़े होने की वजह से आज जगदलपुर शहर में भी इस फिल्म को रिलीज किया गया है. इस फिल्म का नाम मालीपुट मेलोडी है. फिल्म को रिलीज कर फिल्म निर्माता और कलाकारों ने बस्तर जिले में प्रेस वार्ता करके फिल्म के उद्देश्य और कल्चर की जानकारी दी है.
फिल्म निर्माता विशाल पटनायक ने बताया कि उड़ीसा राज्य के कोरापुट में बोले जाने वाली ओड़िया लैंग्वेज में एक फिल्म का निर्माण कराया गया है. यह फिल्म क्षेत्र के निवासियों के रहन-सहन, उनकी भाषा बोली और कल्चर से जुड़ी है. फिल्म के माध्यम से संस्कृति को नेचुरल तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है. कोरापुट और बस्तर में शादी की परंपरा एक जैसी है. संस्कृति भी एक जैसी ही है. कई बार कोरापुट से आकर बस्तर के शादी में शिरकत करने का मौका मिला था. जिससे यह पता लगा कि बस्तर और कोरापुट आपस में कहीं ना कहीं जुड़े हुए हैं.
फिल्म के संगीतकार तोष नंदा बताया कि हमेशा से ही बस्तर के लोग बस्तर के गीतों के साथ ही ओड़िया गीतों का भी भरपुर आनंद उठाते हैं. इस फिल्म में भी नए-नए ओड़िया गीतों को लांच किया गया है. निश्चित ही फिल्म और उनके गीत बस्तर के लोगों को पसंद आएगी. क्योंकि बस्तर और कोरापुट वर्षों से संस्कृति, परंपरा और रहन-सहन के तौर तरीकों से जुड़े हुए हैं. जो वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं उसे बस्तर में मोहरी बाजा कहा जाता है. वही उड़ीसा में उसे ही मंगल वाद्य कहा जाता है. भाषा अलग जरूर है लेकिन बीट और इमोशन एक जैसा है. इस लिहाज से फ़िल्म और गीत दोनों लोगों के दिलो को छूएगा.