जगदलपुर. बस्तर के दुर्गम जंगलों से मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की एक बेहद सुखद खबर सामने आई है, जहां वन विभाग की तत्परता और स्थानीय ग्रामीणों की सजगता के बल पर दो बिछड़े नवजात तेंदुआ शावकों को सफलतापूर्वक उनकी मां से मिला दिया गया है.

इस संवेदनशील कहानी की शुरुआत तब हुई जब चित्रकोट रेंज के पहाड़ी वन क्षेत्र में ग्रामीणों के बच्चों द्वारा एक छोटे शावक को उठाए जाने की सूचना मिली. वन मंडलाधिकारी दीपेश कपिल के कुशल मार्गदर्शन में वन अमले ने बिना वक्त गंवाए देर रात ही शावक को अपने सुरक्षित संरक्षण में ले लिया. योजना के मुताबिक शावक को तड़के घने जंगल के एक चिन्हित स्थान पर इस उम्मीद से रखा गया कि उसकी मां आकर उसे ले जाएगी, लेकिन पहला प्रयास सफल नहीं हो सका और मादा तेंदुआ अपने बच्चे तक नहीं पहुंची.

निराश होने के बजाय टीम ने अपने प्रयास और तेज कर दिए. ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से इलाके में दूसरे बिछड़े शावक को भी खोज निकाला गया. इसके बाद दोनों शावकों को एक साथ एक सुरक्षित जगह पर रखा गया और पूरे इलाके में हाई-रेजोल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाकर पल-पल की निगरानी शुरू की गई.

लगातार 48 घंटे तक चले इस धैर्यपूर्ण और अनवरत रेस्क्यू ऑपरेशन का परिणाम बेहद सुखद रहा. सोमवार की रात कैमरों में वह अद्भुत और भावुक दृश्य कैद हुआ, जिसकी हर कोई उम्मीद लगाए बैठा था. मादा तेंदुआ अपने चिन्हित स्थान पर वापस लौटी, अपने दोनों बच्चों को दुलारा और उन्हें सुरक्षित साथ लेकर घने जंगलों की ओर ओझल हो गई. वन विभाग की सूझबूझ और ग्रामीणों के इस अटूट सहयोग ने साबित कर दिया है कि अगर संवेदनशीलता हो तो इंसान और वन्यजीव जंगलों में सुरक्षित सह-अस्तित्व के साथ रह सकते हैं.