जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भीषण और दर्दनाक राजनीतिक नरसंहार यानी झीरम घाटी मामले में विशेष एनआईए अदालत ने आज शनिवार को अपना अंतिम और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. मई 2013 में बस्तर की दरभा घाटी (झीरम) में हुए इस बर्बर नक्सली हमले ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया था. इस हमले में प्रदेश कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के शीर्ष नेताओं सहित कुल 29 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. पिछले 13 वर्षों से पूरा देश और पीड़ितों के परिजन जिस कानूनी लड़ाई और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे, उस पर आज अदालत ने अपना फैसला सुनाकर इस अध्याय पर मुहर लगा दी है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा पेश किए गए तमाम सबूतों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की लंबी व तीखी बहसों को सुनने के बाद विशेष एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है. न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए नक्सलियों व सहयोगियों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मड़कामी देवा, जोगा मड़कामी, बंजमी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ ड़ेंगा तथा महादेव नाग शामिल हैं. अदालत द्वारा सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब पूरे देश की निगाहें सजा के परिमाण पर टिक गई हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की सजा के परिमाण पर अंतिम सुनवाई आगामी 16 सितंबर को की जाएगी, जिसके बाद सभी दोषियों को मिलने वाली सजा की घोषणा होगी.
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर जानलेवा हमला किया था. इस हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर के कद्दावर नेता व सलवा जुडूम के सूत्रधार महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी. राजनीतिक बयानों, जांच आयोगों, एनआईए की विस्तृत पड़ताल और लंबे कानूनी दांव-पेचों के बाद आज आए इस ऐतिहासिक फैसले ने पीड़ितों के परिवारों को सालों बाद इंसाफ की एक ठोस उम्मीद दी है.