​साहब का ‘दोहरा चश्मा’! सरकारी कॉलोनी में ‘अपनों’ के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, दूसरों के लिए सिर्फ बेदखली का रास्ता!

जगदलपुर. शहर में स्थित एक प्रमुख सरकारी आवास कॉलोनी इन दिनों नए अफसर के पक्षपातपूर्ण रवैये और तुगलकी फरमान को लेकर सुर्खियों में है. इस महकमे में हाल ही में कदम रखने वाले नए आला अधिकारी ने आते ही पूरी कॉलोनी को खाली करने का अल्टीमेटम थमा दिया है, लेकिन इस पूरे मामले के पीछे की जो इनसाइड स्टोरी निकलकर सामने आ रही है उसने कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है. दरअसल, आरोप लग रहे हैं कि नए साहब ‘अपनों पर मेहरबान और गैरों पर पहलवान’ वाला रवैया अपना रहे हैं, जिससे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश की आग सुलगने लगी है.

​इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है वह यह है कि इस सरकारी कॉलोनी के भीतर जिन आवासों को खाली कराया गया है या जहाँ मरम्मत का काम चल रहा है, उन्हें लेकर अंदरखाने भारी भेदभाव का खेल चल रहा है. सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के अनुसार, इस मुख्य महकमे से जुड़े जिन कर्मचारियों के घर खाली करवाए गए हैं, उनके लिए साहब ने अंदर ही अंदर तत्काल शानदार वैकल्पिक व्यवस्था करवा दी है ताकि उनके परिवारों को रहने में कोई तकलीफ न हो। इसके विपरीत, इसी कॉलोनी में सालों से रह रहे अन्य विभागों के शासकीय कर्मचारियों के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया है और उन्हें बिना किसी व्यवस्था या राहत के, सिर्फ और सिर्फ मकान खाली करने के लिए चौतरफा मानसिक और प्रशासनिक दबाव का शिकार बनाया जा रहा है.

​साहब के इस दोहरे मापदंड ने अब व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कर्मचारी अब दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि जब सरकारी आवास खाली कराए जा रहे हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था का यह दोहरा नियम क्यों लागू किया जा रहा है और मुख्य महकमे के लोगों को तुरंत नया घर तथा दूसरों को सिर्फ बेदखली का नोटिस क्यों थमाया जा रहा है. कर्मचारियों का आरोप है कि नए साहब सिर्फ दूसरे महकमे के लोगों को सॉफ्ट टारगेट मानकर अपनी नई कुर्सी का रौब दिखा रहे हैं. इस खुली नाइंसाफी और सौतेले व्यवहार से तंग आकर अब पीड़ित कर्मचारी एकजुट होने लगे हैं और बताया जा रहा है कि चहेतों को फायदा पहुंचाने वाले इस खेल की पूरी शिकायत दस्तावेजी सबूतों के साथ जल्द ही जिला प्रशासन और बड़े नीति-निर्माताओं के टेबल पर सौंपी जाएगी.

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