जगदलपुर. बस्तर के धाकड़ समाज ने सामाजिक सरोकार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अनूठी और अनुकरणीय पहल की है. बस्तर धाकड़ समाज कल्याण समिति (पंजी. क्र. 10281) ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सशक्त बनाने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘धाकड़ समाज कल्याण निधि’ की स्थापना का ऐतिहासिक फैसला लिया है. माता मावली मंदिर परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में समाज के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में इस योजना को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई.
इस अभिनव योजना के तहत समाज के सक्षम और संपन्न सदस्य हर महीने इस कल्याण निधि में अपनी स्वेच्छा से योगदान देंगे. इस तरह एकत्रित हुई राशि को उन बेरोजगार युवाओं को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिया जाएगा, जो पैसों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. समाज के युवा इस राशि की मदद से किराना दुकान, ठेला, सिलाई, मोबाइल रिपेयरिंग और डेयरी फार्मिंग जैसे छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे.
बैठक को संबोधित करते हुए समाज के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि आज भी समाज में कई परिवार ऐसे हैं जो दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बाद भी सिर्फ दो वक्त की रोटी ही जुटा पाते हैं. संकट के समय जब वे साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेते हैं, तो वह कर्ज पीढ़ी दर पीढ़ी उनके लिए एक असहनीय बोझ बन जाता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा समाज तब तक तरक्की नहीं कर सकता, जब तक उसका सबसे कमजोर वर्ग मजबूत न हो, और यह निधि इसी कर्ज के जाल को तोड़ने का एक ईमानदार प्रयास है.
योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए समिति ने साफ किया है कि इस निधि के संचालन में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. एकत्रित की गई राशि का पूरा लेखा-जोखा समाज के सामने सार्वजनिक रहेगा और लोन के लिए लाभार्थियों का चयन पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही किया जाएगा. इसके साथ ही लोन की राशि को एक निश्चित समय सीमा के भीतर वापस करना अनिवार्य होगा, ताकि उस पैसे का रोटेशन बना रहे और भविष्य में अन्य युवाओं को भी लगातार मदद मिलती रहे.
इस बैठक में सामाजिक उत्थान के साथ-साथ सांस्कृतिक दायित्वों पर भी चर्चा हुई. चित्रकोट में बनने वाले भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण को समाज ने अपना परम कर्तव्य माना और उपस्थित सभी समाजजनों ने इस पवित्र कार्य में तन-मन-धन से पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया. बैठक में समिति के सचिव, कार्यकारिणी के सदस्य और भारी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे, जिन्होंने इस पहल को सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक चेतना की एक नई मिसाल बताया है.