जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर जिले में वर्ष 1931 के बाद बीते दिन हुई ऐतेहासिक बारिश ने जमकर तबाही मचाई है. बारिश का रौद्र रूप बस्तर में देखने को मिला है. भारी बारिश का सबसे अधिक असर बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के मांदर पंचायत में देखने को मिला है. जहां भारी बारिश की वजह से आए बाढ़ ने यहां के रहवासियों का सब कुछ तबाह कर दिया है. जिला प्रशासन से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस गांव के 25 मकान पूरी तरह से धराशाई हो गए और 85 से अधिक मकान भी क्षतिग्रस्त हुए है. 50 से अधिक मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए और खेतों में भी खड़ी फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है. हालांकि प्रशासन ने इन बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए एक राहत शिविर बनाया है. लेकिन इस बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या सैकड़ों में है. ऐसे में बीते 2 दिनों से लोग ना ही भरपेट भोजन कर पा रहे है. और ना ही इनके घर में अनाज का एक दाना भी बचा है. बाढ़ ग्रामीणों का सब कुछ बहा ले गया. लोगों के चेहरे में मायूसी छाई हुई है और अब सरकार से कुछ राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे है. घरों में रखे कीमती सामान से लेकर गहने, पैसा, बर्तन, कपड़ा व जरूरी दस्तावेज सब कुछ बह गया है. मांदर, नेगनार व पारापुर यही वह गाँव है जहां से बारिश व बाढ़ के बीच फंसे ग्रामीणों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया था.

बाढ़ प्रभावितों ने बताया कि सुबह 8 बजे बाढ़ आई. लोग अपने घरों से निकलकर भागने लगे. कुछ लोग निकले लेकिन कुछ लोग घरों के अंदर ही फंसे रह गए. कुछ ग्रामीणों का सहारा घर का छत और छज्जा रहा. ग्रामीणों ने बताया कि यदि बाढ़ का पानी 2 फीट और ऊपर बढ़ जाता तो उनकी मौत निश्चित थी. कच्चे मकान के ऊपर कुछ ग्रामीण कंबल ओढ़कर छुपे रहे. कुछ पेडों में चढ़े रहे. ऐसी स्थिति में ग्रामीणों ने अपनी जान बचाई.

बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल की टीम ने देखा कि गांव पूरी तरह से तबाह हो गया है. घर टूटकर बिखर गए है. जिनका घर बच गया उनके घरों में कीचड़ भर गया है. लोग आंखों में आंसू और मायूसी लिए सफाई कार्य मे जुटे हुए हैं. घर मे रखा राशन भीगकर फूल गया है. बोरियों में रखा सैकड़ो क्विंटल धान अंकुरित होकर बर्बाद हो गया. गाड़िया फंसी हुई है. सिलाई मशीन दुकान का सामान, घर का जरूरी सामान सब तबाह हो गया है.

लोहंडीगुड़ा अनुविभागीय अधिकारी नीतीश वर्मा ने बताया कि इस बाढ़ से जनहानि नहीं हुई. लेकिन फसलें व घरों को काफी नुकसान हुआ है. 22 घर पूरी तरह ढह गया है. 85 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है. प्रशासन की टीम सर्वे के कार्य मे जुट गई है. गांव में मेडिकल उपचार कर रही है. राहत शिविर केंद्रों में भोजन, कपड़े के साथ ही आवश्यक सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं.