बीजापुर (डेस्क) – जिला मुख्यालय में आयोजित सद्भावना महोत्सव के तहत ‘एक्सप्लोर बीजापुर’ थीम पर आधारित फोटो प्रतियोगिता ने बस्तर की सुंदरता और यहाँ के जनजीवन के अनछुए पहलुओं को एक नया फलक प्रदान किया है. जिले के इतिहास में अपनी तरह के इस पहले और अनूठे आयोजन ने न केवल बीजापुर की नैसर्गिक सुंदरता को दुनिया के सामने रखा, बल्कि यहाँ के आदिवासी जनजीवन, गहरी लोक आस्था और सुरक्षा के साथ बढ़ते भरोसे की एक बेहद संवेदनशील और रचनात्मक तस्वीर पेश की.
इस प्रतियोगिता में जिले के 14 फोटोग्राफरों ने हिस्सा लिया, जिनकी 40 चुनिंदा तस्वीरों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. हर तस्वीर अपनी एक कहानी कहती नजर आई. निर्णायक मंडल में शामिल कलेक्टर संबित मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव और विधायक विक्रम मंडावी ने तस्वीरों की विषयवस्तु, उनकी तकनीकी बारीकियों और उनके पीछे छिपे संदेशों का सूक्ष्मता से अवलोकन कर विजेताओं का चयन किया.

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच प्रथम स्थान के लिए गणेश मिश्रा और सचिन सिंह को संयुक्त रूप से चुना गया. जहाँ गणेश मिश्रा ने ग्रामीण अंचलों में होने वाले पारंपरिक सामूहिक मत्स्याखेट के रोमांच को अपने कैमरे में कैद किया, वहीं सचिन सिंह की तस्वीर में मानसून के दौरान उफनती इंद्रावती नदी का रौद्र और मनमोहक स्वरूप नजर आया. द्वितीय स्थान भी संयुक्त रूप से तुषार तामड़ी और हर्षिता के नाम रहा. तुषार ने गोधूलि बेला में धूल उड़ाते हुए अपने डेरे की ओर लौटते मवेशियों के शांत दृश्य को उकेरा, तो हर्षिता की तस्वीर ने आदिवासी समाज की अटूट आस्था के केंद्र ‘देवगुड़ी’ और वहां की समृद्ध लोक संस्कृति के दर्शन कराए. इसके अलावा, जनसंपर्क विभाग के शंकरिया राव को जिले में आ रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाती उनकी प्रभावशाली तस्वीर के लिए तृतीय स्थान से नवाजा गया.
सद्भावना महोत्सव के आयोजक मोहम्मद जाकिर खान के मार्गदर्शन और रंजन दास के कुशल संचालन में संपन्न हुई इस प्रतियोगिता की जिले भर में सराहना हो रही है. उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने माना कि यह आयोजन बीजापुर की नकारात्मक छवि को बदलकर यहाँ की कलात्मक और शांतिप्रिय पहचान को स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह प्रतियोगिता महज एक मुकाबला नहीं, बल्कि उन स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने का जरिया बनी जो लंबे समय से बीजापुर की आत्मा को अपनी नजरों से सहेज रहे हैं.