जगदलपुर (डेस्क) – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज ऐतिहासिक लालबाग मैदान में ‘बस्तर पंडुम-2026’ का भव्य शुभारंभ करते हुए कहा कि आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति में ही छत्तीसगढ़ की असली आत्मा निवास करती है. मां दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध परंपराओं की सराहना की और इसे राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा को लेकर समाज और अभिभावकों का आह्वान किया कि वे अपनी बेटियों को उज्जवल भविष्य के लिए पढ़ाई से जोड़ें.

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने संतोष व्यक्त किया कि बस्तर में अब भय और असुरक्षा का वातावरण समाप्त हो रहा है. उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोग अब विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और दुर्गम क्षेत्रों तक बिजली-सड़क जैसी सुविधाएं पहुँच रही हैं. इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर पंडुम को लोक संस्कृति का उत्सव बताते हुए यहाँ की ढोकरा शिल्प कला को देश-विदेश की शान बताया. उन्होंने कहा कि गौर और मुरिया जैसे पारंपरिक नृत्य हमारी सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक हैं.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आयोजन को जनजातीय समाज के सम्मान का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल खात्मे का लक्ष्य तय किया गया है. मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ जानकारी दी कि इस वर्ष के पंडुम में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो बस्तर की जीवंतता को दर्शाता है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा बस्तर के धुड़मारास गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव में शामिल किए जाने का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नियद नेल्लानार और पीएम जनमन जैसी योजनाओं से अब बस्तर के हर घर में विश्वास और आशा का उजाला फैल रहा है. आयोजन के दौरान जनजातीय कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया.