कांकेर- छत्तीसगढ़ के कांकेर में जब बीमारी से पीड़ित मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलती है तब ग्रामीणों के लिए चारपाई ( खाट) ही एम्बुलेंस बन जाती है. क्योंकि बस्तर के ग्रामीणों को किसी भी हाल में अपने परिवार के सदस्यों की जान बचानी होती है. ऐसा ही मामला पखांजुर में सामने आया है. जिसमें मरीज को लेकर ग्रामीण 19 किलोमीटर पैदल चले हैं. और समय पर अस्पताल पहुंचे हैं. जिसकी वजह से मरीज की जान बची है.
दरअसल बस्तर में विकास के दावों की हकीकत सामने आई है. जहां खाट को एम्बुलेंस बना दिया गया. दरअसल एक लकवाग्रस्त युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए जब एम्बुलेंस नहीं मिली तब ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया. और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को ग्रामीणों ने खटिया में लादकर 19 किलोमीटर पैदल सफर तय किया. ये पूरा मामला नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा से लगे बीनागुंडा गांव का है. जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क दोनों नदारद हैं. बताया जा रहा है कि मरीज को तीन दिन तक एम्बुलेंस नहीं मिली थी. परिवार सुबह से एंबुलेंस को फोन करता रहा. लेकिन सिस्टम मानो अनजान बना बैठा था. जब कोई मदद नहीं मिली तो गांव वालों ने खुद ही जिम्मेदारी उठाई और खाट को कंधे पर उठाकर 19 किलोमीटर का सफर तय करते दिखे. और जैसे तैसे छोटेबेठिया BSF कैंप पहुंचने पर गांव वालों को एम्बुलेंस की मदद मिली. और वे सिविल अस्पताल पखांजुर पहुंचे. जहां पीड़ित मरीज का ईलाज जारी है.
सिविल अस्पताल के MBBS डॉ. सुब्रत मल्लिक ने बताया कि मरीज जब अस्पताल पहुंचा. तब उसकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई थी. अस्पताल पहुंचते ही ईलाज शुरू किया गया. और प्राथमिक ईलाज में मरीज की स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की गई. डॉक्टर ने यह भी बताया कि यदि समय पर मरीज अस्पताल नहीं पहुंचता तो उसकी स्थिति काफी गंभीर होती. और संभवतः उसकी मौत भी हो सकती थी. फिलहाल प्राथमिक उपचार किया गया है. और बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल भेजने की तैयारी में डॉक्टर जुटे हुए हैं.