जगदलपुर. स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बस्तर की धरती ने बदलाव और शांति की एक नई भोर देखी. कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित और अभेद्य किला माने जाने वाले बीजापुर के अति-संवेदनशील कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर आखिरकार विजय के प्रतीक के रूप में भारत का राष्ट्रध्वज आन-बान-शान से फहराया गया. तीन दिवसीय और 600 किलोमीटर लंबी बस्तर तिरंगा यात्रा का समापन डिप्टी सीएम विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप द्वारा कर्रेगुट्टा की चोटी पर तिरंगा लहराकर और राष्ट्रगान गाकर किया गया. तीनों जनप्रतिनिधियों ने नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर—इन 5 नक्सल प्रभावित जिलों में खुद मोटरसाइकिल चलाकर जनता और सुरक्षा बलों के जवानों में नया विश्वास जगाया.

कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर जवानों को संबोधित करते हुए भावुक दिखे डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन करार दिया. उन्होंने कहा कि आज वह सपना पूरा हो गया है जो बस्तर की जनता ने देखा था. यह जीत एर्राबोर की कट्टम ज्योति, बस्तर के आम नागरिकों और देश के वीर शहीदों के अदम्य पराक्रम की जीत है, जिसने नक्सलवाद के भय और भ्रम को जड़ से उखाड़ फेंका है. उन्होंने आगे कहा कि लोग अक्सर मंत्रियों पर जवानों का मनोबल बढ़ाने का श्रेय देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वे खुद जवानों के साहस से ऊर्जा प्राप्त करने आते हैं. जवानों की इसी वीरता को नमन करते हुए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट व सराहनीय सेवा पदक से अलंकृत किया है.
“आज बस्तर की जनता की जीत हो गई, यहां के लोग जीत गए और नक्सली हार गए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सीएम विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अपनी लय में आगे बढ़ेगा और देश का सबसे समृद्ध क्षेत्र बनेगा”.
—— डिप्टी सीएम विजय शर्मा
यात्रा के अंतिम दिन बीजापुर से शुरू होकर काफिला आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहुंचा. इस पूरी यात्रा का सबसे भावुक और ऐतिहासिक पल वह रहा जब यात्रा दूसरे दिन की देर रात घोर नक्सल प्रभावित इलाके टेकलगुडेम पहुंची. वहां कुख्यात नक्सली हिड़मा के गृह ग्राम पूवर्ती के ग्रामीण भी हाथों में तिरंगा लेकर डिप्टी सीएम और मंत्रियों का स्वागत करने पहुंचे थे. इसके अलावा मुसलाधार बारिश के बीच भी सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा के सुदूर गांवों में बच्चे और बुजुर्ग घंटों राह तकते रहे और ‘भारत माता की जय’ व ‘तिरंगे की जय’ के गगनचुंबी नारों से पूरा इलाका राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया.
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस पल को अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि जिन इलाकों में जाने से दिन के उजाले में भी लोग कांपते थे, आज वहां बिना किसी डर के तिरंगा फहराना बस्तर के नए युग की शुरुआत है. वहीं सांसद महेश कश्यप ने कहा कि आजादी के 79 वर्षों के बाद पहली बार इन बीहड़ों में तिरंगा पूरी गरिमा और सम्मान के साथ लहरा रहा है.
यात्रा के दौरान मंत्री द्वय और सांसद ने हिंसा का शिकार हुए शहीदों की पावन स्मृति में जगह-जगह पौधारोपण किया और शहीदों के आंगन की पवित्र मिट्टी को संग्रहित किया. उन्होंने शहीद परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों से सीधी आत्मीय बातचीत कर उनका हाल जाना. इस ऐतिहासिक क्षण में दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, जिला प्रशासन के अधिकारियों समेत हजारों की संख्या में स्थानीय युवा और ग्रामीण मौजूद रहे.