जगदलपुर- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बस्तर जिले के गुमलवाड़ा गांव में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण का संदेश पूरे क्षेत्र में गूंजा. ग्राम सभा गुमलवाड़ा व जिला ग्राम सभा संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की 20 ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर जंगलों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया. आम्चो जंगल आम्चो अधिकार अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम की थीम प्रकृति से प्रेरणा, जलवायु संरक्षण और भविष्य का निर्माण रही. आयोजन का उद्देश्य ग्राम सभाओं को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वन प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनके संवैधानिक अधिकारों की जानकारी देना था.
FRA कोर्डिनेटर अनुभव शोरी का कहना है कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 20 ग्राम सभाओं के लोग उपस्थित हुए. जिन्होंने वन संसाधन प्रबंधन के काम, ग्राम सभा शसक्तीकरण, वनोपन के द्वारा आजीविका विकास कार्यों में जुड़े हुए हैं. इस कार्यक्रम में ग्राम सभा सशक्तिकरण के तहत सम्मानित भी किया गया. इस कार्यक्रम में लोगों ने यह संकल्प लिया है कि आने वाले दिनों में बस्तर के जंगलों का संरक्षण करना और स्थानीय रोजगार को तलाशने के साथ ही जंगल बढ़ाना है.

आदिवासी समाज के युवा प्रभाग अध्यक्ष सदस्य संतु मौर्य का कहना है कि बस्तर के मूलनिवासी हमेशा यह नारा लगाते हैं कि जल जंगल जमीन को बचाना है. लेकिन अब केवल नारा ही नहीं लगाना है बल्कि उसके लिए आगे आकर काम करने की भी आवश्यकता है. इसके लिए निर्णय लिया गया. प्लास्टिक बैन पर कार्य किया गया. और खाद्यान सामग्रियों के लिए दोना, पत्तल व अन्य प्राकृतिक बर्तनों का इस्तेमाल किया गया.
पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक नेतृत्व और ग्राम सभा सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 9 ग्राम सभाओं को विशेष सम्मान प्रदान किया गया. सम्मानित ग्राम सभाओं में तिरिया, तीतरी, मुंडापाल, घाटकवाली, बामनरास, कामदेव कुरुषपाल, गुमलवाड़ा, कोंडालुर और कांदानार शामिल हैं.
