जगदलपुर. संभाग के सुकमा जिले में स्थित नवोदय विद्यालय में पढ़ाई करने वाली एक छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद परिजनों को उसके इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. छात्रा आंचल वर्मा के परिजन अशोक वर्मा ने बताया कि नवोदय विद्यालय की स्टाफ नर्स द्वारा बेटी की तबीयत खराब होने की जानकारी दी गई थी, जिसके बाद वे स्कूल पहुंचे तो साधारण दवाई देकर बच्ची को घर भेज दिया गया. घर लाने के बाद भी जब हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उसे छिंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर सुकमा जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जगदलपुर रेफर कर दिया.
जगदलपुर पहुंचने पर भी परिजनों की परेशानियां खत्म नहीं हुईं. 19 अगस्त को MPM अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण निजी चिकित्सक डॉ. मनीष काले के पास इलाज कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई. इसके बाद छात्रा को जगदलपुर के ओम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विभिन्न जांचों और इलाज में अब तक परिजनों के 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं. डॉक्टरों के अनुसार हॉस्टल के खानपान और बाहर की चीजों के सेवन से शरीर में इंफेक्शन हुआ है. फिलहाल बच्ची के पीलिया को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन लिवर में सूजन, पथरी और ओवरी से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट आने पर आगे का इलाज किया जाएगा.
परिजनों का कहना है कि नवोदय विद्यालय के भरोसे बच्चों को छोड़ा जाता है, लेकिन हॉस्टल की व्यवस्था और बच्चों की सेहत पर ध्यान न दिए जाने से मध्यमवर्गीय परिवारों पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ आ पड़ता है. गौरतलब है कि बस्तर संभाग के बीजापुर और सुकमा जिलों में हाल ही में समय पर इलाज न मिलने के कारण मलेरिया से दो छात्रों की मौत हो चुकी है. ऐसे में आवासीय विद्यालयों से लगातार आ रही बीमारियों की खबरों ने बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस पूरे मामले पर सुकमा नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल बलराम जाटव का कहना है कि छात्रा 13 अगस्त को बीमार हुई थी और इससे पहले वह पूरी तरह स्वस्थ थी. प्राथमिक जांच में टाइफाइड के लक्षण मिलने पर स्टाफ नर्स ने शुरुआती इलाज किया और तुरंत परिजनों को सूचित किया, जिसके बाद 13 अगस्त को ही परिजन बच्ची को अपने साथ ले गए थे. उन्होंने बताया कि विद्यालय में प्राथमिक इलाज के लिए नर्स और आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहती है.