जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन के दावों के बीच कोडेनार क्षेत्र से सामने आई तस्वीर माइनिंग विभाग की कार्रवाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग और माइनिंग विभाग को कई बार शिकायतें देने के बावजूद रेत तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. जिसके चलते इलाके में 12 महीने अवैध तरीके से रेत का परिवहन जारी है. यह मामला उस वक्त सामने आया जब कोडेनार में जागरूक युवाओं की टीम ने रेत से भरे 8 टिप्परों को पकड़ लिया. इन वाहनों के जरिए कुम्हार साड़रा क्षेत्र से मजदूरों की मदद से रेत निकालकर उसका परिवहन किया जा रहा था.
सरपंच सोहन पोयाम, उपसरपंच हिडमो मुचाकी ज़ ग्रामीण रवि पोड़ियामी का कहना है कि 18 अगस्त की रात 07 रेत से भरी गाड़ियों को युवाओ की टीम ने पकड़ा है. और 19 अगस्त की सुबह 1 अन्य वाहन को पकड़ा गया है. कोडेनार क्षेत्र के कुम्हारसाड़रा से 12 महीने रेत का अवैध उत्खनन करके परिवहन किया जाता है. रेत परिवहन को लेकर ग्रामीणों ने कई बार शिकायत राजस्व विभाग और खनिज विभाग के साथ गाड़ी मालिकों से की. लेकिन सम्बंधित अधिकारियों की अवैध सांठगांठ के चलते परिवहन का कार्य नहीं रुका और ना ही किसी प्रकार की कोई कार्रवाई हुई. जबकि बारिश के मौसम में उत्खनन और परिवहन के कार्यों में रोक रहती है. इसके बावजूद बेधड़क रेत की तस्करी जारी है. जिससे परेशान होकर ग्रामीणों ने मिलकर खुद यह फैसला लिया और गांव के सरपंच, उपसरपंच, युवाओं ने मिलकर गाड़ियों को पकड़ा है. भारी वाहनों के चलने से सड़के पूरी तरह बर्बाद हो गई है. समय पर एम्बुलेंस को पहुंचने में देरी होती है. स्कूली बच्चों को चलने में दिक्कतें होती है. और यहाँ तक कि पैदल चलने और मवेशियों को ले जाने में भी दिक्कते होती है. ग्रामीणों की मांग है कि रेत उत्खनन और परिवहन को पूर्ण रूप से बंद करना है. क्योंकि खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की जानकारी में रहने के बावजूद इस पर कार्रवाई नहीं होती है. कोडेनार के कोटवारपारा, पटेलपारा, लक्ष्मणपारा, आयतूपारा, गुड्डीपारा इलाके में सड़कें बुरी तरह से खराब है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की जानकारी स्थानीय लोगों को है. और इसकी शिकायतें विभागीय अधिकारियों तक लगातार पहुंच रही हैं. तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. कहीं ऐसा तो नहीं कि इलाके के सम्बंधित अधिकारी अंदरूनी तौर पर सांठगांठ करके तस्करों को मदद पहुंचा रहे हैं. ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है. स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर किसके संरक्षण या लापरवाही के चलते कथित रेत कारोबार लगातार चलता रहा. इस मामले को लेकर तोकापाल एसडीएम से जानकारी लेनी चाही. लेकिन अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाई.