जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर के चिकित्सा जगत में उस वक्त एक चमत्कार हुआ, बीते दिन जब सुकमा से आए एक लहूलुहान मरीज को मेकॉज के डॉक्टरों ने अपनी विशेषज्ञता और जुनून से नई जिंदगी दी. अपनों के ही हमले में दो तीरों से छलनी पिता जब मौत के मुहाने पर खड़ा था, तब डिमरापाल मेडिकल कॉलेज (मेकॉज) के चिकित्सकों ने आधी रात को किसी फरिश्ते की तरह मोर्चा संभाला और असंभव को संभव कर दिखाया. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले केस और डॉक्टरों की जांबाजी की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए मेकॉज के अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने बताया कि यह ऑपरेशन न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि डॉक्टरों की कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल भी था.
डॉ. अनुरूप साहू के अनुसार, सुकमा में घरेलू विवाद के दौरान बेटे के तीरों का शिकार हुए इस व्यक्ति की हालत देख हर कोई दहल गया था. जांघ के गहरे घाव के साथ-साथ एक तीर कलाई के उस नाजुक हिस्से में धंसा था, जहाँ हाथ की मुख्य जीवनदायिनी नसें होती हैं. तीर के दबाव ने हाथ की नसों को लगभग मृत कर दिया था, जिससे मरीज के हमेशा के लिए अपंग होने का खतरा मंडरा रहा था. अधीक्षक डॉ. साहू ने बताया कि रात के सन्नाटे में, करीब 2 बजे जब दुनिया सो रही थी, तब मेकॉज का आर्थोपेडिक्स विभाग किसी युद्ध के मैदान की तरह सक्रिय था. विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत पाल के अनुभवी मार्गदर्शन में सहायक प्राध्यापक डॉ. आदित्य कौशिक ने एक जटिल ऑपरेशन का जिम्मा उठाया.

इस जीवन-रक्षक सर्जरी की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अनुरूप साहू ने बताया कि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. गुलाब सिंह काशी ने अपनी जादुई दक्षता से मरीज को वह सुरक्षा कवच प्रदान किया, जिससे यह पेचीदा सर्जरी सुचारू रूप से संभव हो सकी. तीर ऐसी जगह धंसा था जहाँ एक मिलीमीटर की भी चूक हाथ को हमेशा के लिए बेजान कर सकती थी, लेकिन मेकॉज के इन ‘हीरो’ डॉक्टरों ने अपनी एकाग्रता और सधे हुए हाथों से तीर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. डॉ. साहू ने गर्व से कहा कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि मेकॉज की प्रतिबद्धता का प्रमाण था कि यहाँ का स्टाफ और चिकित्सक हर परिस्थिति में बस्तर की जनता की सेवा के लिए चौबीसों घंटे तत्पर हैं.
आज मरीज की हालत स्थिर है और उसकी कलाई की हरकतें डॉक्टरों की जीत की कहानी कह रही हैं. अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने इस कामयाबी के लिए पूरी टीम और सहायक स्टाफ की भूरि-भूरि प्रशंसा की है. मेकॉज के गलियारों में अब इस सफल ऑपरेशन की चर्चा है, जिसने यह साबित कर दिया है कि जब अनुभवी हाथ और सेवा का जज्बा मिल जाए, तो काल के गाल से भी जिंदगी खींच लाई जा सकती है.