कोंडागांव. जिले में बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो वाहन का गोल-गोल घूमकर खतरनाक स्टंट करते हुए वीडियो जमकर वायरल हुआ. सरेराह जान जोखिम में डालकर किए गए इस स्टंट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और वाहन चालक के खिलाफ चालानी कार्रवाई की. हालांकि, इस कार्रवाई के बाद से ही शहर के गलियारों और आम जनमानस के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय यह है कि उक्त चालक द्वारा पूर्व में भी एक अन्य वाहन के साथ इसी प्रकार के खतरनाक स्टंट को अंजाम दिया गया था. उस समय भी पुलिस की ओर से कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन बार-बार एक ही प्रकार के कानून उल्लंघन की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि नियमों की अवहेलना करने वालों में कानून का खौफ समाप्त हो चुका है. आम जनता में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि यदि यही कृत्य किसी साधारण नागरिक या आम युवा द्वारा किया जाता, तो क्या पुलिस केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित रहती या वाहन जब्ती जैसी कठोर प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाती?
स्थानीय लोगों का मानना है कि नियम और कानून समाज के हर वर्ग के लिए समान होने चाहिए. जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक सड़क पर खतरनाक स्टंट करके अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालता है, तो ऐसे मामलों में कठोरतम दृष्टांत पेश किया जाना चाहिए. चर्चाओं का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि संबंधित चालक के किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने की बातें कही जा रही हैं, जिससे आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि रसूख के बल पर दंडात्मक कार्रवाई का असर बेअसर साबित हो रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम पर जब पुलिस प्रशासन का पक्ष जानने के लिए कोंडागांव थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से कोई स्पष्ट और ठोस जवाब देने के बजाय टालमटोल भरा रवैया देखने को मिला. जिम्मेदार अधिकारियों के इस अस्पष्ट रुख ने जनसामान्य के संदेह को और गहरा कर दिया है. अब देखना यह होगा कि सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने का दावा करने वाला प्रशासन ऐसे मामलों में निष्पक्षता और कड़ाई से कार्रवाई कर जनता के विश्वास को बहाल करता है या फिर कानून के दोहरे मापदंड का यह सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाएगा.