जगदलपुर. बस्तर में एक तरफ गरीब परिवार अपनी थाली में दो वक्त की रोटी और हक के अनाज के लिए कलेक्टोरेट के चक्कर काट-काटकर बेहाल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों के मुंह का निवाला छीनकर उसे दूसरे राज्यों में ब्लैक में बेचने का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला काला खेल धड़ल्ले से चल रहा है. सरकारी राशन की इस खुली डकैती का तब भंडाफोड़ हुआ, जब खाद्य विभाग की टीम ने 30 से 40 बोरी पीडीएस चावल से ठसाठस भरी एक पिकअप को रंगे हाथों धर दबोचा.
मूसलाधार बारिश के बीच हुई इस बड़ी कार्रवाई से राशन माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है. मामले का खुलासा करते हुए सहायक खाद्य अधिकारी दिव्यारानी कार्यान्त ने बताया कि जब टीम ने पिकअप वाहन को पकड़ा, तब उसमें करीब 30 से 40 बोरी सरकारी चावल अवैध रूप से लोड मिला. बारिश के कारण बोरियों की सटीक गिनती में थोड़ी परेशानी जरूर आई, लेकिन जांच आगे बढ़ते ही बड़ा खुलासा हुआ कि यह गाड़ी एक स्थानीय व्यापारी दीपक गुप्ता की है.
प्रशासनिक स्तर पर इस सनसनीखेज मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. सहायक खाद्य अधिकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि बीपीएल कार्डधारियों और गरीब परिवारों का राशन डकारना तथा उसकी तस्करी करना गंभीर अपराध है. इस मामले में शामिल सभी संदिग्धों और व्यापारी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राशन पहुंचाने की है और ऐसे कालाबाजारी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.
बस्तर में घटी इस वारदात ने सरकारी राशन वितरण व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. जनता में भारी आक्रोश है कि जब जरूरतमंद परिवार एक-एक किलो अनाज के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं, तब यह माफिया तंत्र इतने बेखौफ अंदाज में गरीबों का राशन सीमाओं के पार कैसे भिजवा रहा था. इस पूरे खेल के सामने आने के बाद अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस काले नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचकर और कौन-कौन से चेहरों पर शिकंजा कसता है.