बस्तर के 60 वनोपजों का प्रोसेसिंग कर 30 हजार लोगों को रोजगार देने का प्रोजेक्ट 6 साल से अधूरा, बिल्डिंग हो रही खंडहर…..

जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों के लिए रोजगार का सपना दिखाकर खड़ा किया गया ट्राईफ़ेड पार्क आज खुद अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है. 30 हजार आदिवासी ग्रामीणों को वनोपज आधारित रोजगार देने का दावा करने वाला यह प्रोजेक्ट चार साल बाद भी सिर्फ कागज़ों और बयानों तक सिमटकर रह गया है. करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ट्राईफ़ेड पार्क न तो रोजगार दे सका और न ही वनोपज का एक भी प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो पाया. चार साल पहले बड़े समारोह के साथ ट्राईफेड पार्क का लोकार्पण हुआ. आदिवासी अंचल के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनके तेंदूपत्ता, महुआ, सालबीज और अन्य वनोपज का सही दाम मिलेगा. और स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगने से हजारों लोगों को काम मिलेगा. लेकिन आज हालात ये हैं कि करोड़ों का यह परिसर एक माली एक कर्मचारी और दो गार्ड के भरोसे खड़ा है. ना वनोपज खरीदी शुरू हुई. ना प्रोसेसिंग यूनिट लगी और ना ही आदिवासियों को रोजगार मिला. रख-रखाव के अभाव में भवन भी धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है.

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर का कहना है कि इस योजना के शुरू नहीं होने का जिम्मेदार सरकार है. जबकि साल 2020 में MOU करवाया गया था. MOU होने के बाद भूमि अधिग्रहण किया जाता है. और 50 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट तैयार किया जाता है. इस प्रोजेक्ट के पीछे बस्तर में पाए जाने वाले 60 प्रकार के वनोपज का प्रोसेसिंग करके करीब 30 हजार लोगों को रोजगार से जोड़ना था. 2021 में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के द्वारा लोकार्पण किया गया. लेकिन कोई काम शुरू नहीं हुआ. बिल्डिंग बने 6 साल पूरे हो गए हैं. अब तो उसकी स्थिति भी जर्जर हो रही है. वहीं आदिवासियों के ट्राइफेड के 50 करोड़ रुपये को डकारने का आरोप भी लगाया है. यदि सरकार इसे नहीं चला सकती है तो बस्तर के लोकल लोगों को उसे सौंप दें. ताकि बस्तर के लोगो को रोजगार प्राप्त हो. फिलहाल इसमें इमली प्रोसेसिंग यूनिट लगा हुआ है. जिसमें काम नहीं हो रहा है. मशीन रख रखाव के अभाव में खराब हो रही है. वहीं महुआ, टोरा, हर्रा, बेहड़ा सहित अन्य वनोजप का प्रोसेसिंग यूनिट लगना था. जो नहीं लगा है. इसे जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए. इसके साथ ही इसके निर्माण की जांच होनी चाहिए. और भ्रस्टाचारियों और लापरवाहों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

बस्तर सांसद महेश कश्यप का कहना है कि फूडपार्क का लोकार्पण केंद्र सरकार के द्वारा बस्तर में किया गया था. पिछले 5 साल कांग्रेस की सरकार थी. जिसने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया. इस प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री से मुलाकात हुई है. जल्द से शुरू करने का प्रयास किया जाएगा. और शुरू होने से निरंतर चलेगा. 2 दिन के दिखावा के लिए नहीं होगा.

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