जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. 25 मई 2013 को हुए खूनी हमले में 27 लोगों की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है. मृत्युदंड की सजा पर कानून के मुताबिक हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक होगी. दोषियों के पास फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील का कानूनी अधिकार रहेगा. झीरम घाटी मामले में कुल 24 धाराएं 10 आरोपियों के खिलाफ लगी हुई थी. जिसमें 7 धाराओं में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है. वहीं अन्य धाराओं में आजीवन कारावास, 10 साल की सजा व अन्य सजा के साथ अर्थदंड भी लिया गया है.
इन 10 दोषियों को सुनाई गई सजा
अदालत ने प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमी, बंजामी सन्ना उर्फ चामरू और महादेव नाग को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
25 मई 2013 को दहल उठा था बस्तर
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी से गुजर रहा था. इसी दौरान घात लगाए माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया. गोलीबारी और हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई लोग मारे गए. इस हमले में सुरक्षाकर्मियों और आम लोगों की भी जान गई थी व बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. विभिन्न रिकॉर्ड में मृतकों की संख्या 27 तक बताई गई है. हमले की जांच बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई. लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान अदालत के सामने पेश किए. मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था. लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई. इसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहा. 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 16 सितंबर को सजा सुनाने की तारीख तय की गई थी.
हाई कोर्ट में चुनौती का रास्ता खुला
मृत्युदंड के मामलों में निचली अदालत का फैसला अंतिम रूप से लागू नहीं होता. कानून के अनुसार मृत्युदंड की पुष्टि संबंधित हाई कोर्ट से आवश्यक होती है. वहीं दोषियों को फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार भी रहेगा. इस वजह से आज का फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक बड़ा पड़ाव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया इसके बाद भी जारी रह सकती है.