जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में पिछले 04 दशक से काबिज माओवादियों की समाप्ति के लिए 31 मार्च आखरी डेडलाइन है. और डेडलाइन के तहत लगातार माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर पुनर्वास कर रहे हैं. दंडकारण्य में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले माओवादी नेता पापाराव अपने साथियों के साथ आज मंगलवार को जंगल से बाहर निकल रहे हैं. आगामी दिनों में सभी 19 माओवादी अपने हथियार के साथ पुलिस के समक्ष पुनर्वास की प्रकिया में शामिल होंगे.

नक्सल संगठन में खूंखार माओवादी कहे जाने वाले पापाराव स्थानीय दोरला जनजाति से ताल्लुख रखता है. दोरला जनजाति के कम ही आदिवासी ऐसे हैं. जो माओवादी संगठन में नेतृत्व के स्तर तक पहुंचे हुए हैं. पापाराव ऊर्फ सुनम चंदरैय्या ऊर्फ मंगू दादा ऊर्फ चंद्रन्ना नक्सल संगठन में एक बड़ा नाम है. साल 2010 में घटे ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड पापाराव को बताया जाता है.

पापाराव के पुनर्वास करने से बस्तर में नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा है. पापा राव के पास छत्तीसगढ़- तेलंगाना सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहे और सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम क्षेत्रीय समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी. संगठन की रणनीतिक गतिविधियों और कैडर संचालन में प्रमुख भूमिका रही है. पापाराव ने कहा कि लगातार नक्सल संगठन के ऊपर दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.

मिली जानकारी के अनुसार पापाराव और उनकी पूरी टीम बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व इलाके में मौजूद है. और अपने अन्य साथियों के इंतज़ार में है. जिनकी सरकार और पुलिस के अधिकरियों से पुनर्वास को लेकर बातचीत की गई है. जल्द ही पुलिस उनके बाहर निकलने के लिए इंतज़ामात कर रही है. कुछ घंटे के बाद पापाराव अपने 18 साथियों के साथ जंगल से बाहर निकलेंगे. और पुलिस और सरकार के समक्ष अपने हथियार को डालकर पुनर्वास करेंगे.

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