बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में चार दशक से काबिज माओवादी संगठन को समाप्त करने के लिए देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 की आखिरी डेडलाइन तय की है. और इस डेडलाइन के तहत लगातार सुरक्षाबल के जवान, अधिकारी बस्तर में विभिन्न रणनीतियों के साथ कार्य कर रहे हैं. एक तरफ सुरक्षाबल के जवान माओवादियों की कोर इलाके में पहुंचकर मुठभेड़ में माओवादियों को मार गिरा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में माओवादी संगठन के सदस्य अपने हथियारों को लेकर वापस मुख्य धारा में लौट रहे हैं. बीते दिनों तेलंगाना में 130 माओवादी सदस्य ने अपने हथियार को छोड़ा और पुनर्वास किया था. वहीं आज 11 मार्च को बस्तर जिले में 108 माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं. यह कार्यक्रम आज पुलिस अधिकारियों के समक्ष दोपहर 2 बजे पूरी होगी.

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) पहल के अंतर्गत DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के कुल 108 माओवादी कैडर, समाज के वरिष्ठ जनों, पुलिस /केंद्रीय सुरक्षा बलों व जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि हिंसा त्यागकर समाज की मुख्यधारा में प्रवेश करने वाले कैडरों द्वारा प्रदान की गई सूचनाओं एवं अन्य असूचनाओं के आधार पर भारत देश के नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी की गई है. बीजापुर जिला सहित बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद किए गए डंप को भी रेंज मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा.

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