कचनार में किसान का फर्जी हस्ताक्षर कर 11,359 रुपए का खाद निकाले! लैम्स प्रबंधक पर गंभीर आरोप, अब कार्रवाई कब?

बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में सितंबर महीने में आये चक्रवाती तूफान और बाढ़ से किसानो के फसलों को हुए नुकसान से वे अब तक उभर नही पाए हैं. वहीं दूसरी तरफ खाद की कालाबाजारी से एक बार फिर किसानों को नुकसान हुआ है. ताजा मामला बस्तर ब्लॉक के कचनार गांव का है, जहां लैम्स प्रबंधक ने एक किसान के जाली दस्तखत कर सरकारी खाद का गबन कर लिया है. किसान ने बैंक खाते के स्टेटमेंट में इसकी जानकारी निकाली तो पता चला कि उनके नाम से जाली दस्तखत कर 11 हजार 359 रुपए का खाद खरीदने के नाम से खाते में लोन चढ़ा दिया गया है. इसकी जानकारी मिलने के बाद किसान श्यामलाल कश्यप ने लैम्स में जमकर बवाल मचाया.

किसान श्यामलाल ने बताया कि कई महीने से वह सरकारी खाद लेने के लिए लैम्स के चक्कर काटते रहा और उसे यह कहकर वापस लौटाया जा रहा था कि अब तक खाद का स्टॉक नहीं आया है, और बचा हुआ खाद खत्म हो चुका है. ऐसे में खेत मे फसल तैयार करने के लिए समय निकलते जाने से उसने बाहर से ही मजबूरन ऊंचे दामों में पोटास, यूरिया, डीएपी और खाद खरीदा. इसके बाद अपने बैंक खाते की स्टेस्टमेंट निकालने के दौरान पता चला कि सरकारी लैम्स से उनके द्वारा 11 हजार 359 रुपये का खाद खरीदना दिखाया गया है. और सरकारी रसीद पर भी किसान श्यामलाल के जाली दस्तखत किए गए हैं. ऐसे में किसान जब लैम्स पहुंचा तो लैम्स प्रबंधक और वहां मौजूद स्टॉफ ने इसे अपनी गलती बताते हुए किसान के लोन वाले खाते में रकम वापस करने की बात कही. किसान श्यामलाल का आरोप है कि लैम्स प्रबंधक ने उनके जाली दस्तखत कर उनके हक में मिलने वाले खाद की कालाबाजारी कर बाहर बेच दिया है. ऐसे में उन्होंने इस मामले में लैम्स प्रबंधक ललिता राव के खिलाफ बस्तर थाना में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

इधर मामला उजागर होने के बाद आनन-फानन में लैम्स प्रबंधक ने किसान के लोन खाते में 11 हजार 359 रुपए वापस डाल दिया है. किसान श्यामलाल का कहना है कि लैम्स प्रबंधक द्वारा वापस किए रकम को उनके लोन वाले खाते में डाल दिया गया है. और इसमें भी लापरवाही बरती गई है. अब उस रकम को कर्ज में दिखाया जा रहा है.

वहीं इस मामले में लैम्स प्रबंधक ललिता राव का कहना है कि यह बाय मिस्टेक हुआ है. हालांकि लैम्स से खाद खरीदी की रसीद में किसान श्यामलाल के जाली दस्तखत कौन किया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है. लेकिन वह खुद मान रही है कि किसान श्यामलाल के जाली दस्तखत सरकारी रसीद में किए गए हैं. वहीं अब लीपापोती करते हुए लैम्स प्रबंधक ललिता राव का कहना है कि जो रकम 11 हजार 359 रुपए किसान के खाते में लोन दिखाया गया. उसे वापस उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है.

इधर किसान श्यामलाल कश्यप और कचनार के अन्य किसानों ने इस जालसाजी पर कार्रवाई करने के लिए बस्तर थाना में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. वहीँ थाना प्रभारी संतोष सिंह ने इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात की है.

गौरतलब है कि सरकारी खाद की कालाबाजारी की खबर हमेशा से ही बस्तर में आती रही है. लेकिन इस तरह का यह पहला मामला है जब एक किसान के जाली दस्तखत कर उनके नाम से करीब 11 हजार 359 रुपए का खाद निकाल लिया गया और बकायदा उनके खाते में खाद खरीदी की लोन चढ़ा दी गई. ऐसे में इस इलाके में रहने वाले बाकि किसानों के साथ भी इस तरह के फर्जीवाड़ा की गई है. इसकी विभागीय जांच करने की मांग कचनार के सभी किसानों ने प्रशासन से की है.

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