बस्तर- बीते दिनों छत्तीसगढ़ के बस्तर में आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई. बाढ़ से लोगों के मकान ढह गए. हजारों किसानो के फसल बर्बाद हो गए. लेकिन मुआवजे के नाम पर केवल खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए कांग्रेस व किसानों ने मिलकर आज बस्तर कलेक्ट्रेट कार्यालय घेरा है. हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने शहर में रैल्ली निकली और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे. जिसके बाद जमीन में बैठकर लंबे समय तक नारेबाजी करते रहे. इनमें महिला, पुरुष युवा सभी वर्ग के लोग शामिल थे. किसानों और कांग्रेस की प्रमुख मांग उचित मुआवजा राशि व कर्जमाफी शामिल है. सांकेतिक रूप से किसान अपने खराब फसल को भी लेकर जिला प्रशासन को दिखाने के लिए लेकर पहुंचे. 10 दिन बाद ट्रेक्टर से शहर बंद करने की चेतावनी दी है.
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के साथ खानापूर्ति कर रही है. बाढ़ प्रभावित किसानों को 65 हजार रुपये देना पड़ेगा. खेती के लिए किसानों द्वारा लिए गए केसीसी लोन को माफ करना होगा. मकान क्षति में कच्चे मकान को 3 लाख, पक्के मकान को 5 लाख और आंशिक मकान को 1 लाख रुपये देना होगा. बाढ़ में बहे मवेशी के लिए 60 हजार रुपये देना होगा. यह मांगे पूरी नहीं होती है तो आगामी दिनों के बाद ट्रैक्टर मार्च शहर में किया जाएगा. जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. इसके बाद भी यदि मांगे पूरी नहीं होती है तो कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी. जो दिन रात जारी रहेगी. सरकार राष्ट्रपति के आगमन, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के नाम पर करोड़ो खर्च कर रही है. लेकिन बाढ़ पीड़ितों को देने के लिए नहीं है. कांग्रेस की सरकार में किसानों का कर्जा माफ किया गया था. बस्तर के जनप्रतिनिधि 500 करोड़ मुआवजा राशि की मांग ही कर रहे है. लेकिन देने के लिए कोई पहल नहीं होती.

दयाराम कश्यप जिला अध्यक्ष किसान कांग्रेस का कहना है कि आगामी 10 दिनों के बाद ट्रैक्टर से पूरे जगदलपुर शहर को ब्लॉक किया जाएगा. और राज्य शासन को चेतावनी दिया जाएगा और उचित मुआवजे की मांग की जाए. सरकार की 6/4 योजना एक तरह से बच्चों को लॉलीपॉप देकर ठगने का कार्य किया जाता है. वैसी ही सरकार करती है. एक एकड़ में पारी को छोनले के लिए करीब 8 हजार रुपये खर्च होता है. खुद सरकार 21 क्विंटल धान खरीदने की बात करती है. लेकिन 8 हजार देने की बात करती है.
अपर कलेक्टर सीपी बघेल का कहना है कि राजस्व अमला द्वारा किये गए बाढ़ सर्वे से अभी तक मकान क्षति का करीब 30 करोड़ रुपये मुआवजा राशि प्रदान किया गया है. फसल क्षति का आंकलन चल रहा है. जिसमें 50 लाख मुआवजा प्रभावितों के खाते में चला गया है. किसानो के ज्ञापन को राज्यपाल तक पहुंचाया जाएगा.