10वीं से 5वीं की नौकरी, मेज और लैपटॉप छोड़ कभी खौफ का नाम रहे माओवादी, अब विश्वविद्यालय के अधिकारी…..

गढ़चिरौली- कभी माओवादी संगठन में सक्रिय रहकर हथियार उठाने वाले और सुरक्षाबलों के लिए चुनौती माने जाने वाले वेणुगोपाल आज एक नई पहचान के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. 70 वर्षीय वेणुगोपाल अब महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में गोंडवाना विश्वविद्यालय की एकल केंद्र परियोजना से जुड़े हैं. कभी जिनके नाम से खौफ जुड़ा था. आज वही व्यक्ति मेज, लैपटॉप और सरकारी दस्तावेजों के सहारे आदिवासी समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहा है. उनकी जिंदगी का यह बदलाव आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास और नई शुरुआत की एक अलग कहानी बयां करता है.

करीब एक साल पहले 15 अक्टूबर 2025 को वेणुगोपाल ने अपने जीवन का एक बड़ा फैसला लिया था. उन्हें सोनू के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने छह करोड़ रुपये के इनामी 22 माओवादियों के साथ हथियारों समेत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था. आत्मसमर्पण के दौरान उनके साथियों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने का संकल्प लिया था. आज वेणुगोपाल गोंडवाना विश्वविद्यालय की एकल केंद्र परियोजना में समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं. यह परियोजना ग्रामसभाओं को मजबूत बनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने और आदिवासी समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर केंद्रित है.

वेणुगोपाल की नियुक्ति के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. उन्होंने अखबार में नौकरी का विज्ञापन देखा और आवेदन कर दिया. इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास निर्धारित थी. आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित कानूनों की जानकारी के साथ पेसा अधिनियम, सामुदायिक वन अधिकार, मनरेगा और जैव विविधता कानून जैसे विषयों की समझ भी जरूरी थी. वन प्रबंधन, आदिवासी समुदायों के साथ काम करने का अनुभव और गढ़चिरौली जिले की किसी तहसील में काम करने की तैयारी भी अपेक्षित थी. वेणुगोपाल इन मानदंडों पर खरे उतरे.

वेणुगोपाल मानते हैं कि अब उन्हें उन मुद्दों की जमीनी हकीकत समझ में आने लगी है, जिनका विरोध वे पहले माओवादी विचारधारा के प्रभाव में करते थे. उनके मुताबिक यदि इन कानूनों और अधिकारों की सही जानकारी पहले मिल गई होती, तो शायद लोगों को उनका लाभ पहले ही मिल जाता.

ग्रामसभाओं को मजबूत बनाने की पहल

एकल केंद्र परियोजना का उद्देश्य ग्रामसभाओं और जिला प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है. इसके तहत सामुदायिक वन अधिकार, जैव विविधता रजिस्टर व वन एवं जल संरक्षण जैसे विषयों पर ग्रामसभा सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाता है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाना भी इसका अहम हिस्सा है.

नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के आयुक्त मीणा के मुताबिक परियोजना के चार प्रमुख उद्देश्यहैं. ग्रामसभाओं को प्रशिक्षित करना, सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना, वन संरक्षण को बढ़ावा देना और आदिवासी समुदायों को बिचौलियों के बिना लघु वनोपज बेचने में सक्षम बनाना. उनके अनुसार गढ़चिरौली की लगभग 1200 ग्रामसभाओं में से करीब 750 के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं.

गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रशांत बोकारे बताते हैं कि परियोजना को जारी रखने के लिए विशेष अध्ययन मंडल बनाया गया है. इसके तहत 16 से अधिक सदस्यों की टीम काम कर रही है. वर्ष 2022 से अब तक लगभग 600 ग्रामसभाओं के करीब 3,500 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है. वहीं 232 ग्रामसभाओं को वन प्रबंधन योजनाएं तैयार करने में मदद मिली है और 100 से अधिक ग्रामसभाओं को सामुदायिक वन अधिकार हासिल करने में सहयोग दिया गया है.

गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के अनुसार वेणुगोपाल की नियुक्ति से जुड़े निर्णय में विश्वविद्यालय के संदर्भ भी देखे गए थे. उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाना चाहिए.

हालांकि वेणुगोपाल की नियुक्ति को लेकर कुछ विरोध भी सामने आया है. संघर्ष समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि माओवादी हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों और निर्दोष आदिवासियों की जान गई है. ऐसे में पूर्व माओवादी कैडरों को पद देने से पहले पीड़ितों के प्रति जवाबदेही और न्याय के सवालों पर भी विचार होना चाहिए. वेणुगोपाल इन आरोपों से इनकार करते हुए कहते हैं कि वे अपनी वर्तमान भूमिका में पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं. वे महाराष्ट्र की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के कई पहलुओं से संतुष्ट हैं. हालांकि उनका मानना है कि गिरफ्तार किए गए साथियों को रिहा करने की प्रक्रिया में और तेजी आनी चाहिए. उनका कहना है कि माओवादी संगठन छोड़ने के बाद नई जिंदगी शुरू करना आसान नहीं होता. समाज में भरोसा दोबारा कायम करना और अपने अतीत से आगे बढ़ना एक लंबी प्रक्रिया है. वेणुगोपाल के मुताबिक आत्मसमर्पण के समय कुछ लोगों ने उन्हें गद्दार कहा था. लेकिन अब उनके काम को देखकर लोगों की सोच में बदलाव आया है.

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