बीजापुर- छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है. ओडिशा राज्य में सक्रिय चार माओवादी कैडरों समेत कुल छह माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वाले सभी छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनमें चार PPCM और दो PM रैंक के कैडर शामिल हैं. इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
चार माओवादियों पर 8-8 लाख का इनाम
आत्मसमर्पण करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष और कोसा माड़वी उर्फ सतीश शामिल हैं. इन चारों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था. वहीं देवे मड़कम उर्फ जन्नी पर दो लाख रुपये और लालू ताती पर एक लाख रुपये का इनाम था. पुलिस के अनुसार इन छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
आत्मसमर्पण करने वाले चार कैडर ओडिशा राज्य में सक्रिय कंपनी नंबर 08 और अन्य माओवादी इकाइयों से जुड़े रहे थे. इनमें रानी सोढ़ी उर्फ संध्या और पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता PPCM रैंक पर कार्यरत थीं. सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष ओडिशा में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की सुरक्षा में तैनात रहा था जबकि कोसा माड़वी उर्फ सतीश कंपनी नंबर 02 में PPCM और ए-सेक्शन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहा था. अन्य दो कैडरों में देवे मड़कम उर्फ जन्नी ओडिशा की कंपनी नंबर 08 में पार्टी सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी थी. वहीं लालू ताती गंगालूर एरिया कमेटी से जुड़ा था. लालू ताती और कोसा माड़वी संगठन से फरार चल रहे थे.
कई बड़ी घटनाओं में शामिल होने का आरोप
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की विभिन्न माओवादी गतिविधियों और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में संलिप्तता रही है. रानी सोढ़ी उर्फ संध्या का नाम ओडिशा और महाराष्ट्र में हुई कई घटनाओं में सामने आया है. जनवरी 2026 में ओडिशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ में भी शामिल थी. जिसमें दो माओवादी मारे गए और दो घायल हुए थे. इस दौरान वह स्वयं भी घायल हुई थी. सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष कई वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहा और ओडिशा में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की सुरक्षा में तैनात था. कोसा माड़वी उर्फ सतीश पर वर्ष 2006 में NMDC के CISF कैंप, वर्ष 2016 में चेरली CRPF कैंप और वर्ष 2024 में तेकुलगुड़ा CRPF कैंप पर हुए हमलों में शामिल होने का आरोप है. लालू ताती का नाम तेकुलगुड़ा घटना, एलमागुंडा कैंप पर हमले और अन्य माओवादी गतिविधियों में सामने आया है. पुलिस के अनुसार अन्य आत्मसमर्पित कैडर भी ओडिशा में माओवादी कैंपों और सुरक्षा बलों से संबंधित कई घटनाओं में शामिल रहे हैं.