जगदलपुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिली थाना क्षेत्र में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में, छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और मोस्ट वांटेड माओवादी कमांडर माडवी हिड़मा सहित 6 शीर्ष कैडरों के मारे जाने की बड़ी खबर सामने आ रही है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के शुरुआती संकेत इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बता रहे हैं.

सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता के प्रमुख बिंदु

​आंध्र प्रदेश की विशेष ग्रेहाउंड्स (AP Greyhounds) बल ने यह सफलतम कार्रवाई की –

इस मुठभेड़ में माड़वी हिड़मा उर्फ संतोष CCM (सेंट्रल कमेटी मेंबर), राजे उर्फ राजक्का DVCM (डिवीज़न कमेटी मेंबर), चेल्लुरी नारायण उर्फ सुरेश SZCM (स्पेशल जोन कमेटी मेंबर), टेक शंकर और दो अन्य कैडर मारे गए.

मुठभेड़ स्थल : अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिली क्षेत्र के नेल्लूरु ग्राम के जंगल.

समय : जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ आज सुबह 6 बजे शुरू हुई.

बस्तर आईजी का बयान : बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने कहा कि आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है, पर यह कदम वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है.

कौन था माड़वी हिड़मा ? ‘आतंक का पर्याय’

​माडवी हिड़मा (उम्र 43 वर्ष), छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का निवासी था. वह छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जंगलों में आतंक का सबसे बड़ा चेहरा था.

सबसे घातक पद : वह सीपीआई (माओवादी) की सबसे खतरनाक हमलावर इकाई पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख था.

सेंट्रल कमेटी सदस्य : वह सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी (CCM) का सबसे युवा सदस्य था, और बस्तर क्षेत्र से इस सर्वोच्च समिति में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी था.

मास्टरमाइंड : हिड़मा गुरिल्ला वारफेयर और घात लगाकर हमले (Ambush) करने का माहिर था. वह अपने साथ 200 से 250 प्रशिक्षित नक्सलियों की एक विशेष सुरक्षा टुकड़ी रखता था.

इनाम : विभिन्न एजेंसियों द्वारा उस पर ₹50 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक का इनाम घोषित था.

हिड़मा का खौफनाक आपराधिक इतिहास

● ​हिड़मा कम से कम 26 घातक हमलों का मास्टरमाइंड था, जिसने देश को हिलाकर रख दिया था.

● ​2010 ताड़मेटला हमला: 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत. देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक.

● ​2013 झीरम घाटी नरसंहार: कांग्रेस की शीर्ष राज्य नेतृत्व सहित 31 लोगों की हत्या, जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को बदल दिया.

● ​2017 सुकमा हमला (बुरकापाल): 25 सीआरपीएफ जवानों की शहादत.

● ​2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा कर्मियों की शहादत.

​इन सभी बड़े हमलों की सीधी कमान हिड़मा ने ही संभाली थी. उसकी मौत की खबर अगर आधिकारिक रूप से सत्यापित हो जाती है, तो इसे नक्सल आंदोलन के खिलाफ एक बड़ी सफलता कहा जा सकता है.

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