जगदलपुर. सेवा केवल चंद घंटों की ड्यूटी या आजीविका का जरिया नहीं होती, बल्कि यह दिल से दिल के रिश्ते बुनने की साधना है. इसकी एक ऐसी भावुक मिसाल बस्तर के शासकीय उच्च प्राथमिक शाला भूरसुंडी में देखने को मिली, जहाँ 10 वर्षों तक अपनी ममता और निष्ठा से हर दिल पर राज करने वाले दिव्यांग भृत्य पीलू राम नाग को अश्रुपूरित आंखों से विदाई दी गई.
एक हाथ से दिव्यांग होने के बावजूद पीलू राम ने कभी अपने कर्तव्यों में कोई कमी नहीं आने दी. विद्यालय का हर कोना और हर बच्चा उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुका था. जब उनके मूल पदस्थापना स्थल, माध्यमिक शाला फरसापारा के लिए स्थानांतरण का आदेश आया, तो उनके सामने 10 साल पुराने इस आत्मीय परिवार को छोड़ने की कठिन घड़ी आ खड़ी हुई. जाते-जाते भी पीलू राम का मन बच्चों के प्रति अपने स्नेह को उड़ेल देने को आतुर था. उन्होंने अपने निजी खर्च पर विद्यार्थियों के लिए एक आत्मीय न्योता भोज का आयोजन किया. थाली में जब गरमा-गरम राहर की दाल, छोले, आलू की सब्जी और मिष्ठान में जलेबी परोसी गई, तो बच्चों के चेहरे खिल उठे. भोजन की हर एक बाइट में उस इंसान का निस्वार्थ प्रेम घुला था, जिसने एक दशक तक उन्हें अपने बच्चों की तरह सींचा था. भावुक होकर उन्होंने कहा कि भूरसुंडी विद्यालय उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि परिवार रहा है और यहाँ के बच्चों की मासूम मुस्कान उनकी अंतिम सांस तक स्मृतियों में ज़िंदा रहेगी. इस विदाई समारोह में भूरसुंडी और महुगुडा प्राथमिक शाला के लगभग 90 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए. अपने प्रिय भृत्य का हाथ थामे बच्चों की आंखें छलक आईं. भोजन करते वक्त उत्साह तो था, लेकिन अपनों से बिछड़ने का दर्द उनके मासूम चेहरों पर साफ नजर आ रहा था. संस्था प्रभारी शैलेन्द्र कुमार तिवारी, शिक्षिका रश्मि नेताम, हेमलता कश्यप सहित पूरे विद्यालय परिवार ने पीलू राम की कर्तव्यनिष्ठा और आत्मीयता को नमन करते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की. यह आयोजन महज़ एक कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं, बल्कि इंसानियत, समर्पण और निःस्वार्थ प्रेम से बने उस अटूट रिश्ते की अमिट मिसाल बन गया.