बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के एकमात्र जगदलपुर नगर निगम में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है. दरअसल सिंतबर माह में आये चक्रवाती तूफान से बाढ़ के समय जरूरतमंदों तक पहुचाने वाली खाद्य सामाग्री निगम के दफ्तर में पड़ी पड़ी सड़ गयी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब नगर निगम के 13 नम्बर के कमरे से सड़े हुए खाद्य सामानों से बदबू आने लगी. और यह बदबू पूरे निगम कार्यालय में फैल गयी. आनन फानन में कमरे को खोला गया. जहां रखे आलू प्याज और अन्य राशन सामान सड़कर खराब हो गये. करीब एक महीने से निगम के दफ्तर में रखे इस राशन सामान का वितरण जरूरतमंदों तक सही समय पर नही किया गया. जिसके चलते यह खराब हो गया. करीब 200 से ज्यादा परिवारों के लिए रखी राशन सामाग्री में आलू, प्याज से लेकर दाल और चावल भी था. अब इनमें से कई खाद्य सामान करीब करीब सड़ चुकी है. निगम में खाद्य सामाग्री के खराब होने का मामला सामने आने के बाद राशन वितरण की व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है. वहीं अब इस मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है.
नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने आरोप लगाया है कि निगम सरकार की लापरवाही की वजह से ही जरूरतमंदों को वितरण किए जाने वाला राशन सामान सड़ गया. जगदलपुर के कई समाज सेवको और विभिन्न संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया और खाद्य सामग्री वितरण के लिए नगर निगम को दिया. लेकिन नगर निगम ने लगभग 200 परिवारों का सामान निगम दफ्तर के स्टोर रूम में रख दिया. जिसमें आलू प्याज और अन्य खाद्य सामग्री भी था. जो पूरी तरह से अब सड़ चुका है और वितरण करने योग्य नहीं है. इसके जिम्मेदार निगम के महापौर व अधिकारी कर्मचारी है.

महापौर संजय पांडे का कहना है कि इसमें जरूर लापरवाही बरती गई है. और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्यवाही भी की जाएगी. लेकिन कांग्रेस इस मामले में राजनीति रोटी सेक रही है. नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी का भी कमरा इस 13 नंबर कमरे के सामने हैं. उनका भी दायित्व बनता है कि समय रहते वे राशन सामाग्री का वितरण जरूरतमंदों तक करवाने की पहल करें. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कर राशन सामाग्री में रखे आलू प्याज के सड़ने का इंतजार किया. और उसके बाद अब इस पर राजनीति कर रहे हैं. ममहापौर ने बताया कि खाद्य सामग्री में केवल 10 किलो आलू और प्याज ही सड़े हुए हैं. बाकी खाद्य सामान पूरी तरह से सुरक्षित है और जल्द ही इसका वितरण जरूरतमंदों तक किया जाएगा.
गौरतलब है कि चक्रवाती तूफान की वजह से बस्तर में सैकड़ो मकान ढह गए. हजारो एकड़ में फसल खराब हो गई. ऐसे में शहर के कई सामाजिक संगठनों ने आगे बढ़कर बाढ़ पीड़ितों की मदद की, जिन जगहों पर संगठन के लोग नहीं पहुंच पाए ऐसे इलाको में निगम ने उनसे खाद्य सामग्री लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचाने का दायित्व लिया. लेकिन यह लापरवाही का ही नतीजा है कि अब बड़ी मात्रा में जरूरतमंदों तक पहुंचाये जाने वाली राशन पूरी तरह से सड़ गई और अब इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है.