बस्तर दशहरा: जोड़ी बेल फल में विराजती हैं देवी दंतेश्वरी और माणिकेश्वरी! राजा ने मांगी थी क्षमा, तभी से निभाई जा रही बेल जात्रा की परंपरा……

जगदलपुर- 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में रविवार (सप्तमी) के दिन एक और महत्वपूर्ण रस्म की अदायगी की गई. इस रस्म को बेल जात्रा या बेल पूजा कहा जाता है, दरअसल इस रस्म में बेल वृक्ष और उसमें एक साथ लगने वाले 2 बेल फलों की पूजा की जाती है. ऐसे इकलौते बेल रस्म को बस्तर के लोग अनोखे और दुर्लभ तरीके से मनाते हैं. जगदलपुर शहर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर सरगीपाल गांव में सालों पुराना बेल वृक्ष है. जिसमें एक के अलावा दो फल भी एक साथ लगते हैं. और इसी बेल वृक्ष और जोड़ी बेल फल की पूजा अर्चना परंपरा अनुसार बस्तर दशहरा पर्व में बस्तर राजपरिवार के सदस्य द्वारा की जाती है.

बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने बताया कि यह रस्म विवाह उत्सव से संबंधित है. उन्होंने बताया कि बस्तर के चालुक्य वंश के राजा सर्गीपाल गांव के पास के जंगलो में शिकार करने गए थे. और वहां इस बेल वृक्ष के नीचे खड़ी दो सुंदर कन्याओं को देख राजा ने उनसे विवाह की इच्छा प्रकट की. जिस पर कन्याओं ने उनसे बारात लेकर आने को कहा. अगले दिन जब राजा बारात लेकर वहां पहुंचे तो दोनों कन्याओं ने उन्हें बताया कि वे उनकी इष्ट देवी माणीकेश्वरी और दंतेश्वरी हैं. उन्होंने हंसी ठिठोली में राजा को बारात लाने को कह दिया था. इस वाक्य से शर्मिंदा राजा ने दंडवत होकर अज्ञानता वश किए गए अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगते हुए उन्हें दशहरा पर्व में शामिल होने का न्योता दिया. और तब से यह विधान संपन्न की जा रही है.

मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने बताया कि 2 जोड़ी बेल फल को दोनों देवियों का प्रतीक माना जाता है. और हर साल बेल न्योता में राजा खुद इस गांव में आकर जोड़ी बेल फल को तोड़ते हैं. और सम्मान पूर्वक उसे दंतेश्वरी मंदिर में सम्मान पूर्वक स्थापित किया जाता है.

बेल पूजा विधान के दौरान सर्गीपाल गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता है. राजपरिवार के सदस्य का स्वागत और बेटी की विदाई दोनों का अभूतपूर्व नजारा यहां देखने को मिलता है. रविवार को इस रस्म को धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ दशहरा पर्व के समिति के सदस्य और राज परिवार के भी सदस्य मौजूद रहे. वहीं सोमवार को महाअष्टमी के दिन रात को निशा जात्रा की रस्म अदा की जाएगी.

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