बस्तर- अपनी अनूठी परंपराओं, आदिवासी संस्कृति और 75 दिनों तक चलने वाले विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे की भव्यता से बस्तर अब विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है. बस्तर की 600 साल पुरानी परंपराएं, देवी दंतेश्वरी के प्रति अटूट आस्था और जनजातीय समाज की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए डेनमार्क से चार पर्यटकों की टीम बस्तर पहुंची है. 16 दिनों के इस प्रवास में पर्यटक बस्तर दशहरे की खासियतों को जानने और यहां की संस्कृति को महसूस करने में जुटे हैं. भाषा भले ही अलग है, लेकिन स्थानीय लोगों का अपनापन, चेहरे के भाव और सांस्कृतिक रंग उन्हें बस्तर से जोड़ रहे हैं.
डेनमार्क से आए विदेशी पर्यटकों ने कहा कि पहली बार वे छत्तीसगढ़ के बस्तर में आए हैं. इसीलिए वे काफी उत्सुक है. बस्तर के लोग काफी अच्छे हैं. बस्तर काफी पसंद आया है. खासकर बस्तर दशहरे को काफी एंजॉय कर रहे हैं. बस्तर के ग्रामीण इलाकों और आदिवासी समुदाय के लोग काफी आकर्षक हैं. जो काफी पसंद आये हैं. भाषा अलग होने के कारण बातचीत उतनी समझ नहीं आ रही है. लेकिन उनके चेहरे के भाव और कल्चर से बहुत कुछ समझ आ रहा है. और कुछ ईशारों से भी समझ आता है. कठिन चीज़ो को समझने में स्थानीय नागरिक उनकी सहायता गाइड के रूप में कर रहे हैं. हो सकता है कि वे बस्तर दुबारा आएं. इससे पहले इंडिया 4 बार आ चुके हैं. 4 सदस्यों की टीम 16 दिनों के लिए बस्तर आई है. इस दौरान प्रमुख रूप से बस्तर दशहरा को देखा जा रहा है. और पड़ोसी राज्य उड़ीसा के कल्चर और नैसर्गिक सौंदर्य को देखने का प्लान है.