बाढ़ ने छीनी छत, बस्तरिया बैक बेंचर्स ने लौटाई आस! कुरुषपाल की दो विधवा महिलाओं को बनाकर दिया पक्का सहारा…..

जगदलपुर- बस्तर में कुछ दिनों पहले आई भीषण बारिश और बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए. किसी का घर ढह गया तो किसी की जिंदगीभर की जमा-पूंजी पानी में बह गई. खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं और कई परिवारों के सामने दोबारा जीवन शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई. इस प्राकृतिक आपदा ने सबसे ज्यादा उन गरीब परिवारों को प्रभावित किया. जिनके पास न तो आर्थिक संसाधन थे और न ही घर को दोबारा खड़ा करने का सहारा. ऐसे मुश्किल वक्त में बस्तर के युवाओं की टीम ‘बस्तरिया बैक बेंचर्स’ ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई है. टीम ने जगदलपुर के समीप बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित कुरुषपाल गांव में दो जरूरतमंद परिवारों को अपने खर्च पर प्रोफाइल शीट से एक-एक कमरे का मकान बनाकर दिया है. शनिवार को दोनों परिवारों ने रिबन काटकर अपने नए आशियाने में प्रवेश किया. जिन परिवारों के पास सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची थी, उन्हें अब बारिश और ठंड से बचने के लिए एक सुरक्षित छत मिल गई है.

बाढ़ में उजड़ गया आशियाना, तीन बच्चों के साथ बेबस थी केसावती

कुरुषपाल गांव की रहने वाली केसावती कश्यप का मकान बाढ़ के पानी में पूरी तरह ढह गया था. घर उजड़ने के बाद उनके सामने तीन छोटे बच्चों के साथ रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई. कुछ दिनों तक उन्हें राहत शिविर में गुजारने पड़े. जब वह वापस अपने घर लौटीं तो वहां न मकान बचा था और न ही सिर ढकने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था. मुश्किल परिस्थितियों में केसावती को समझ नहीं आ रहा था कि बच्चों को लेकर कहां जाएं और किस तरह अपने परिवार को संभालें. इसी दौरान बस्तरिया बैक बेंचर्स के युवाओं ने उनसे संपर्क किया और उनकी परेशानी को समझते हुए मदद का निर्णय लिया. टीम ने आपसी सहयोग से राशि जुटाई और कुछ ही दिनों में उनके लिए प्रोफाइल शीट से एक कमरे का मकान तैयार कर दिया. इससे केसावती और उनके बच्चों को रहने के लिए तत्काल सहारा मिल गया.

केसावती के मुताबिक शासन की ओर से उन्हें मकान के लिए 1 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि जरूर मिली है, लेकिन उससे घर तैयार करने में समय लगता. तत्काल रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी परेशानी बढ़ रही थी ऐसे समय में युवाओं ने आगे आकर मकान बनवाया. जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है. उन्होंने इस मदद के लिए पूरी टीम का आभार जताया.

पति की मौत के बाद मजदूरी से पाल रही थीं परिवार, बाढ़ ने छीन लिया घर

इसी गांव में रहने वाली देवकी भारती की कहानी भी संघर्ष और बेबसी से भरी है. कुछ वर्ष पहले बीमारी के कारण उनके पति का निधन हो गया था. इसके बाद दो बेटों और एक बेटी के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. देवकी दूसरों के खेतों में मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पाल रही थीं. परिवार पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. इसी बीच बाढ़ ने उनका मिट्टी का मकान पूरी तरह तबाह कर दिया. घर में रखा सामान भी पानी में बह गया. पति को खोने के बाद किसी तरह परिवार संभाल रही देवकी के सामने अब रहने की जगह का संकट खड़ा हो गया. जब बस्तरिया बैक बेंचर्स की टीम को उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मिली तो युवाओं ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया. टीम ने आपसी सहयोग से राशि जुटाई और उसी स्थान पर प्रोफाइल शीट से एक कमरे का मकान बनाकर तैयार कर दिया.

देवकी भारती ने बताया कि मकान तैयार करने में उन्हें अपनी ओर से कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ा. युवाओं ने अपने संसाधनों से घर बनवाकर दिया है. उनके लिए यह सहायता बेहद महत्वपूर्ण है. क्योंकि इससे उन्हें और उनके बच्चों को रहने के लिए सुरक्षित जगह मिल गई है. उन्होंने भावुक होकर युवाओं को धन्यवाद दिया.

आपदा के शुरुआती तीन दिनों में 3 हजार से अधिक परिवारों तक पहुंचाया भोजन

बस्तरिया बैक बेंचर्स की यह पहल केवल दो परिवारों को मकान बनाकर देने तक सीमित नहीं है. बाढ़ के दौरान भी टीम के युवाओं ने राहत और बचाव के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई थी. टीम के सदस्यों के अनुसार बाढ़ के शुरुआती तीन दिनों में तीन हजार से अधिक प्रभावित परिवारों तक दो वक्त का भोजन पहुंचाने का प्रयास किया गया. राहत कार्य के दौरान जब युवा कुरुषपाल पहुंचे तो उन्होंने गांव में बाढ़ से हुई तबाही को करीब से देखा. कई मकान पूरी तरह ढह चुके थे और लोग अपने परिवारों के साथ कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर थे. इसी दौरान टीम की नजर केसावती कश्यप और देवकी भारती के परिवारों पर पड़ी. दोनों महिलाएं अपने परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही थीं और बाढ़ के कारण उनका आशियाना पूरी तरह उजड़ चुका था.

युवाओं ने तय किया कि केवल भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने से इन परिवारों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. उन्हें तत्काल ऐसी व्यवस्था की जरूरत थी, जहां वे अपने बच्चों के साथ रह सकें. इसके बाद टीम के सदस्यों ने आपस में पैसे इकट्ठा किए. कुछ अन्य लोगों ने भी सहयोग का हाथ बढ़ाया और दोनों परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास तैयार करने का काम शुरू हुआ. लगातार प्रयासों के बाद दोनों मकान बनकर तैयार हो गए. शनिवार को दोनों परिवारों ने रिबन काटकर अपने नए घर में प्रवेश किया. यह उनके लिए केवल मकान का उद्घाटन नहीं, बल्कि मुश्किल दौर में फिर से जिंदगी शुरू करने की एक नई उम्मीद थी.

कोविड काल से सेवा कार्यों में जुटी है टीम

बस्तरिया बैक बेंचर्स बस्तर के उन युवा समूहों में शामिल है, जो कोविड काल से ही जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आगे आते रहे हैं। संकट के समय भोजन उपलब्ध कराने से लेकर आपदा प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने जैसे कार्यों में टीम के सदस्य सक्रिय रहे हैं. हालिया बाढ़ के दौरान भी टीम ने प्रभावितों तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया. अब दो परिवारों को मकान बनाकर देने की पहल ने उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को एक बार फिर सामने रखा है.

टीम का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं। ऐसे परिवारों को दोबारा खड़ा होने के लिए तत्काल सहयोग की जरूरत होती है। इसी सोच के साथ दोनों महिलाओं को मकान बनाकर देने का निर्णय लिया गया. युवाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका प्रयास आगे भी जरूरतमंद और असहाय लोगों की सहायता करने का रहेगा, ताकि विपरीत परिस्थितियों में कोई परिवार खुद को अकेला महसूस न करे.

ग्रामीणों ने की सराहना, सेवा भावना बनी चर्चा का विषय

कुरुषपाल गांव में दोनों परिवारों को छत मिलने के बाद ग्रामीणों ने भी बस्तरिया बैक बेंचर्स की पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि आपदा के समय जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना ही सच्ची सामाजिक सेवा है। खासकर ऐसे परिवारों की मदद करना, जिनके पास अपने घर को दोबारा बनाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, बेहद सराहनीय कदम है. केसावती कश्यप और देवकी भारती के लिए यह मकान केवल प्रोफाइल शीट से बनी एक संरचना नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी नई उम्मीद है। बाढ़ ने उनके घरों को जरूर उजाड़ दिया, लेकिन युवाओं की मदद ने उन्हें फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला दिया है. आज जब दोनों परिवारों को अपनी छत मिल गई है, तब यह पहल समाज को एक संदेश भी देती है कि बड़ी मदद करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। संवेदनशील सोच, आपसी सहयोग और जरूरतमंदों के प्रति जिम्मेदारी का भाव हो तो छोटे-छोटे प्रयास भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

इन युवाओं ने मिलकर साकार की पहल

बस्तरिया बैक बेंचर्स की इस सेवा पहल में रिम्पी सहानी, महेंद्र महापात्र, संजय ठाकुर, शेख ताहिर, अशोक नायडू, मंजूर रजा, नाथू दुग्गा, अजय सेठिया, राहुल सेठिया, सोनू भदोरिया और विक्की गुप्ता सहित टीम के सदस्यों ने योगदान दिया. बाढ़ ने दो परिवारों से उनकी छत छीन ली थी, लेकिन बस्तर के इन युवाओं ने अपने सहयोग और संवेदनशीलता से उन्हें फिर से एक आशियाना दे दिया. यही सेवा, सद्भावना और मानवता की असली पहचान है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

BastarFiles