राष्ट्रपति से दूसरी कन्या को मिलाने पर नाराजगी, पनका-पनिका समाज ने की काछनगादी रस्म की महत्ता को शैक्षणिक पाठ्यक्रमो में शामिल करने की मांग…..

बस्तर- जगदलपुर में पनका-पनिका समाज ने अपने 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुँच मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौपा है. समाज के लोगों का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में सबसे महत्वपूर्ण काछनगादी रस्म पनका पनिका समाज के द्वारा ही अदा किया जाता है. पनका समाज के ही 9 साल की कन्या कांटो की झूले में लेटकर बस्तर दशहरा पर्व मनाने की राजा को अनुमति देती है.

सहायक पुजारी सागर ने कहा कि बस्तर दशहरा के दौरान इस साल 2026 में काछनदेवी पीहू दास की जगह किसी और कन्या को महामहिम राष्ट्रपति से जगदलपुर के लालबाग मैदान में मिलाया गया. इससे समाज के लोगो को काफी आहत पहुंचा है. जिला प्रशासन के अधिकारियो के द्वारा हुई इस त्रुटि को लेकर समाज निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है. और दोषियों पर कार्यवाही किए जाने के भी समाज की मांग है. समाज इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ेगी. हो सकता है कि जिसे मिलाया गया हो वो किसी बड़े अधिकारी की बेटी हो. पीहू दास गरीब है इसीलिए उसे नहीं मिलाया गया. इसके लिए कोर्ट की भी लड़ाई समाज लड़ेगा.

इसके अलावा समाज के लोगों का कहना है कि हर साल काचनगादी रस्म में हजारों की संख्या में पुरे बस्तर संभाग और अन्य जिलों से पनका पनिका समाज के लोग बस्तर पहुंचते हैं. लेकिन यहां प्रशासन के द्वारा उनके रुकने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की जाती है. समाज के द्वारा लंबे समय से सामुदायिक भवन की मांग की जा रही है. लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सामुदायिक भवन निर्माण करने की मांग की है. इसके अलावा काछन देवी के ऐतिहासिक और संस्कृति महत्ता को छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग समाज के लोगों ने की है. वहीँ पनका पनिका जाति को अनुसूचित जनजाति में बहाली करने की भी मांग समाज के लोगो ने मुख्य रूप से की है.

अपर कलेक्टर सीपी बघेल का कहना है कि बीते दिनों राष्ट्रपति दौरे के दौरान काछनदेवी निभाने वाली बालिका के जगह दूसरे को मिलाया गया. जिसके विरोध में आज समाज ने ज्ञापन सौंपा है. जिसे आगे बढ़ा दिया जाएगा.

यह हैं ​समाज की 5 प्रमुख माँगें….

​प्रशासनिक त्रुटि की निष्पक्ष जाँच एवं कार्रवाई: राष्ट्रपति मुलाकात विवाद के लिए दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

​सामुदायिक भवन का निर्माण: बस्तर दशहरा के दौरान संभाग व अन्य जिलों से आने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं और समाज के लोगों के ठहरने के लिए जगदलपुर में उचित व्यवस्था हेतु सामुदायिक भवन हेतु भूमि व कोष स्वीकृत किया जाए।

​पाठ्यक्रम में काछनदेवी की गाथा: काछनदेवी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व को छत्तीसगढ़ के स्कूली व शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

​अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में बहाली: पनका-पनिका जाति को पुनः अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल/बहाल किया जाए।

​परंपरागत अधिकारों का संरक्षण: बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपराओं में समाज की सहभागिता, सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

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