जगदलपुर- बस्तर के चित्रकोट स्थित प्राथमिक कुडुक मछुआ व नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष धनसिंह बघेल को सहकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य के प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है. इंद्रावती नदी के तट पर बसे इस अंचल में कभी ग्रामीण केवल पारंपरिक मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और कृषि पर ही आश्रित थे. मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत वर्ष 2009 में 42 सदस्यों को संगठित कर इस समिति की नींव रखी गई. जिसने आगे चलकर ग्राम पंचायत के रावनमुंडा और वर्ष 2014 से चित्रकोट सिंचाई जलाशय को पट्टे पर लेकर मत्स्यपालन की दिशा में एक नया मोड़ लिया.

प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के पर्यटन महत्व को देखते हुए समिति ने सहकारिता विभाग के माध्यम से नौका विहार को भी अपनी गतिविधियों में शामिल किया. वर्तमान में 62 सदस्यों (41 पुरुष व 21 महिलाएं) की सहभागिता वाली यह समिति आजीविका और स्वावलंबन का एक सशक्त केंद्र बन चुकी है. जलाशय व नदी से प्रतिवर्ष 1,980 और 3,600 किलोग्राम मछली उत्पादन कर करीब साढ़े 9 लाख रुपये की आय अर्जित की जा रही है. जबकि पर्यटकों को नौका विहार कराकर सालाना लगभग 8 लाख रुपये की आमदनी हो रही है. समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ 10 लाख रुपये तक पहुँच चुका है. जिसमें अकेले वर्ष 2024-25 में ही 8,32,985 रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज हुआ.
वर्तमान में इस समिति के पास 250 लाइफ जैकेट, 7 नावें और आधुनिक उपकरण मौजूद हैं. शासन की अनुदान और योजनाओं से मिली शुरुआती मदद के बाद अब यह समिति पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुकी है. जिसके दम पर इन्होंने अपने स्वयं के खर्चे से मछली अवतरण के लिए लैंडिंग सेंटर का निर्माण कराया है और परिवहन हेतु पिकअप वाहन भी खरीदा है. इस आर्थिक प्रगति से सभी 62 परिवारों के जीवनस्तर में व्यापक बदलाव आया है. सदस्य अपने आवागमन के लिए मोटरसाइकिल खरीद रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में सक्षम हुए हैं. धनसिंह बघेल के नेतृत्व में इस समिति ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों, सहकारिता और पर्यटन के सुनियोजित मेल से वनांचल के लोगों की तकदीर बदली जा सकती है.