बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में बीते दिनों आई भीषण बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है. खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई. कई इलाकों में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. लेकिन बाढ़ के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है. इसी को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के सदस्यों ने आज सोमवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है. किसानों की मांग है कि केसीसी लोन के साथ काटी गई फसल बीमा की राशि के आधार पर तत्काल सर्वे कराया जाए और नुकसान के अनुरूप उचित मुआवजा दिया जाए. अन्यथा 6 नवंबर को बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करेंगे.
किसान यूनियन टिकैत के जिला अध्यक्ष रमेश गोयल का कहना है कि केसीसी लोन के नाम पर लैम्प्स से खाद बीज और पैसा लिया जाता है. वहीं लैम्प्स प्रबंधक द्वारा बीमा के नाम पर राशि काटा जाता है. बीते दिनों आये बाढ़ की वजह से फसल 100% खराब हो चुका है. यह फसल लाखो हेक्टेयर में नष्ट हुए हैं. जो राशि फसल बीमा के नाम काटा गया है. उसके आधार पर सर्वे कराने के बाद उचित मुआवजा राशि दिया जाए. बाढ़ को आये लगभग 1 महीने से अधिक समय हो गया. लेकिन शासन प्रशासन ना बातचीत कर रहा है. और ना ही उचित मुआवजा के लिए कोई ठोस कदम उठा रहा है. शासन प्रशासन किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रही है. मांगे समय पर पूर्ण नहीं होने पर आगामी 6 नंवबर को कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया जाएगा. सभी ट्रैक्टर व अन्य वाहन लेकर पहुंचेंगे.