बस्तर- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद कोटमसर गुफा जिसे भूमिगत दुनिया भी कहा जाता है. इस गुफा को पर्यटकों के लिए 20 अक्टूबर की सुबह 8 बजे खोला जा रहा है. इस साल मौसम अनुकूल होने के कारण गुफा को समय से 10 दिन पहले खोला जा रहा है. जबकि हर साल इस गुफा को 1 नवंबर छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव के दौरान खोला जाता था.

कांगेर वैल्ली DFO गौतम नारायण ने बताया कि इस साल कोटमसर गुफा को पर्यटकों के लिए जल्दी खोला जा रहा है. क्योंकि इस साल मौसम काफी अच्छा है. बारिश भी बस्तर में नहीं हो रही है. इससे पूर्व हुई बारिश का पानी भी गुफा के भीतर नहीं ठहरा है. जिससे फिसलन या अन्य समस्याएं पर्यटको के लिए उत्पन्न नहीं होगी. साथ ही वर्तमान में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा भी चल रहा है. इस दशहरे को देखने के लिए हजारों लोग बस्तर आते हैं. इस लिहाज से इस गुफा को खोलने से काफी संख्या में पर्यटक भी इसका दीदार कर सकेंगे. कांगेर वैल्ली में अन्य गुफाएं भी मौजूद हैं. जिनमें कैलाश गुफा, दंडक गुफा, अरण्यगुफा, हरी गुफा लेकिन केवल कोटमसर गुफा को ही फिलहाल खोला जा रहा है.

गौरतलब है कि इस गुफा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जमीन के नीचे एक अलग ही दुनिया दिखाई देती है. जहां चट्टानों ने हजारों वर्षों में अनोखे आकार धारण किए हैं. हजारों साल पुरानी चूना पत्थर की आकृतियां बनी हुई है. अंधेरी दुनिया मे रहने वाली अंधी मछलियां भी मौजूद है. गुफा के अंदर कई प्राकृतिक कक्ष हैं. कई प्राकर्तिक संरचनाएं हैं. सबसे बड़ी खासियत स्टैलेक्टाइट और स्टैलेक्माइट से बनी आकृतियां है. बड़े हाल और टाइटेनिक जहाज की तरह बने आकृतियां भी लोगो को आकर्षित करती है.
इस गुफा की लंबाई करीब 330 मीटर है, चौड़ाई अलग अलग रास्तों कक्षों में 20 से 70 मीटर है. वहीं गहराई जमीन की सहत करीब 35-40 मीटर है. जगदलपुर शहर से इसकी दूरी 35-40 किलोमीटर है. मानसून में जलभराव के कारण गुफा को बंद रखा जाता है.