जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर कलेक्ट्रेट कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित समान नागरिक संहिता ( UCC ) कानून को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी. जिस बैठक में बस्तर के मूलनिवासियों का जमकर विरोध देखने को मिला. वहीं।मुश्लिम समाज ने भी बैठक में नहीं बुलाने को लेकर नाराजगी जताई. इधर बैठक के दौरान UCC को छोड़कर बस्तर में पेशा कानून एक्ट को पूरी तरह लागू करने की मांग उठी. और बस्तर में जल जंगल और जमीन की बात कही गई. बैठक के दौरान और कलेक्ट्रेट कार्यकाल के परिसर में मूलनिवासियों ने जमकर नारेबाजी की.
सर्व आदिवासी समाज के संभागीय युवा प्रभाग अध्यक्ष संतु मौर्य का कहना है कि बैठक में विवाह एवं तलाक, उत्तराधिकारी एवं विरासत, भरण पोषण एवं सहायता और लिव इन संबंध के विषय मे चर्चा किया जाना था. जो कि बस्तर की संस्कृति से बिल्कुल उलट है. बस्तर की बेटी यदि दूसरे समाज के लिए जाती है तो उस समाज के लोग उस जमीन पर हक जताकर केस करते हैं. साथ ही भरण पोषण का कार्य बस्तर में अच्छी तरह से सभी को आता है. लड़की के माता पिता बेहतर तरीके से करते हैं. और शादी के बाद उसका पति और परिवार भी बेहतर तरीके से भरण पोषण करने आता है. साथ ही लिव इन संबध जिसे बस्तर के लोग कभी जानते नहीं हैं. और ना ही ऐसे शब्द सुने हैं. इसे जबरदस्ती थोपने का कार्य किया जा रहा है. बस्तर के मूलनिवासियों के साथ कुम्हार, धाकड़, सुंडी, कलार सहित अन्य लोग बस्तर के विवाह व्यवस्था और अन्य चीजों पर समानता रखते हैं. जिनसे बातचीत होनी थी. विवाह और तलाक पर भी चर्चा होनी थी. लेकिन बैठक किसी को बुलाया नहीं गया है. काफी कम लोग उपस्थित हुए हैं. यही सबसे बड़ा विरोध बस्तर और छत्तीसगढ़ से है.
संतु ने आरोप लगाया कि UCC कानून बस्तर में सुई के समान घुसने वाला है. बस्तर के मूलनिवासी आदिवासी ना ही हिन्दू हैं और ना ही ईसाई है. लेकिन बस्तर में जबरदस्ती हिन्दू अधिनियम का पालन करवाया जाता है. यह पहले से काफी गड़बड़ है. वैसे ही UCC को भी लागू करेंगे. पहले कहेंगे कि यह आप के ऊपर लागू नहीं है, फिर कहेंगे कि यह भारत का कानून है इसका पालन होना चाहिए. फिर सबको वही करना पड़ेगा. इसीलिए बस्तर में इस कानून का पुरजोर तरीके से विरोध हो रहा है. सरकार यदि यह चाहती है तो शिक्षा पर समानता, स्वास्थ्य पर समानता और रोजगार पर समानता का कानून लागू करें. बस्तर की आस्था और संस्कृति के खिलाफ ही लाये जा रहे कानून का विरोध हो रहा है.

कोंडागांव मुश्लिम समाज के अध्यक्ष प्यारू भाई का कहना है कि अचानक इस बैठक की सूचना दी गई. और बैठक में बोलने का भी अवसर नहीं दिया गया. मुश्लिम समाज की ओर से UCC कानून का पुरजोर विरोध है. जो समाज UCC का समर्थन करता है उस पर कानून लागू किया जाए और जो समर्थन नहीं करता है उस समाज को अलग रखा जाए. यह मुश्लिम समाज की मांग है.