सुकमा (नवीन कश्यप) – जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की बढ़ती सक्रियता अब माओवादियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है. इसी क्रम में CRPF की 131वीं वाहिनी ने एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम देते हुए बोटेटोंग गांव के आसपास के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपाए गए नक्सलियों के हथियार डंप को बरामद कर उनके नेटवर्क को तगड़ा झटका दिया है.

​यह पूरी कार्रवाई पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर की गई. सूचना मिलते ही सहायक कमांडेंट आनंद कुमार त्रिपाठी और सहायक कमांडेंट मुकुंद सिंह के नेतृत्व में CRPF की टीम ने तड़के ही बोटेटोंग गांव और उसके आसपास के जंगली क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था. सुरक्षाबलों ने बेहद सतर्कता और सोची-समझी रणनीति के साथ पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है. तलाशी अभियान के दौरान जवानों ने फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) मेटागुडेम-इरापल्ली से करीब 5 किलोमीटर दूर घने जंगलों में छिपे हुए उस ठिकाने को ढूंढ निकाला जिसे नक्सलियों ने बड़ी चालाकी से ओझल कर रखा था.

​इस डंप की तलाशी लेने पर सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में घातक सामग्री और दैनिक उपयोग का सामान मिला. बरामद सामानों में दो देसी सिंगल शॉट राइफल, लगभग ढाई किलो मॉडिफाइड अमोनियम नाइट्रेट, आईईडी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तीन इंजेक्शन, स्विच, चार्जिंग सॉकेट, पेंसिल सेल और लोहे के हुक शामिल हैं. इसके अलावा मौके से नक्सलियों का टेंट, तिरपाल, दवाइयां, हैंड सैनिटाइजर, थर्मामीटर, चमड़े की बेल्ट और माओवादी साहित्य भी बरामद किया गया. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक और आईईडी के सामान का एकत्र होना इस बात का संकेत है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे.

​चिंतागुफा और आसपास के इलाकों में पहले भी आईईडी ब्लास्ट और सुरक्षाबलों पर हमले की घटनाएं होती रही हैं. नक्सली अक्सर इन घने जंगलों का सहारा लेकर हथियार और विस्फोटक डंप कर देते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों द्वारा नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित करने और गश्त तेज करने से नक्सलियों का दायरा काफी सीमित हो गया है. इस सफल ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं. सबसे राहत की बात यह रही कि पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी जवान सुरक्षित अपने कैंप लौट आए.

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