बीजापुर (डेस्क) – छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में विकास और शांति की दिशा में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. राज्य शासन की ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति से प्रभावित होकर 12 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों में 8 महिला और 4 पुरुष शामिल हैं, जिन पर कुल 54 लाख रुपये का ईनाम घोषित था. इन कैडरों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों के समक्ष एके-47 और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियारों के साथ समर्पण किया है.

​सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणामों के चलते आज बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम और बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के सामने इन कैडरों ने अपने हथियार डाल दिए. आत्मसमर्पण करने वालों में दरभा डिवीजन का डीव्हीसीएम सोमडू मड़कम प्रमुख है, जिस पर 8 लाख रुपये का ईनाम था और उसने अपनी एके-47 रायफल के साथ सरेंडर किया है. इसके अलावा बटालियन नंबर 01 और कंपनी नंबर 02 की महिला सदस्यों समेत कई अन्य ईनामी नक्सलियों ने भी हिंसा का परित्याग किया. समर्पण के दौरान माओवादियों ने न केवल व्यक्तिगत हथियार सौंपे, बल्कि भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, जिसमें 250 जिलेटीन स्टीक और 400 डेटोनेटर शामिल हैं, भी स्वेच्छा से पुलिस के हवाले किए.

​इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर जिले में जनवरी 2024 से अब तक कुल 888 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जो क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का प्रमाण है. पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने इस घटनाक्रम को माओवादी संगठन के अंत की शुरुआत बताते हुए कहा कि सुरक्षा कैंपों की स्थापना और सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार से नक्सलियों का आधार क्षेत्र लगातार सिमट रहा है. वहीं, एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे खोखली विचारधारा को छोड़कर शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं. आत्मसमर्पित सभी कैडरों को सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई है और उनके पूर्ण पुनर्वास के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

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