सुकमा (नवीन कश्यप) – दोरनापाल नगर पंचायत में जारी हालिया टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बबीता माड़वी ने प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाया है कि पंचायत प्रशासन ने निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से न चलाते हुए अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है. इस मामले का खुलासा होते ही क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है.

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत दोरनापाल ने 10 अक्टूबर को एक पत्र के माध्यम से लगभग 11 अलग-अलग कार्यों के लिए लाखों रुपये की लागत वाले टेंडर जारी किए थे. लेकिन स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर की जानकारी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई. न ई-पब्लिशिंग की गई, न ही नोटिस बोर्ड पर समय पर सूचना चिपकाई गई.

बबिता ने आरोप लगाया कि :

● निविदा प्रक्रिया को जानबूझकर गुप्त रखा गया.

● कई पात्र ठेकेदारों को सूचना मिलने तक तारीख निकल चुकी थी.

● टेंडर की शर्तें कुछ खास लोगों को ध्यान में रखकर तय की गईं.

● नियमों के विरुद्ध कम समय में आवेदन लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई.

स्थानीय स्तर पर इस टेंडर प्रक्रिया को ‘फिक्स्ड टेंडर’ कहा जा रहा है. लोगो ने इसे खुला भ्रष्टाचार बताते हुए जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बबीता माड़वी ने कहा- यह पूरी प्रक्रिया संदेह के दायरे में है. नियमों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सभी पात्र ठेकेदारों के लिए समान अवसर वाली होनी चाहिए. लेकिन यहां ऐसा प्रतीत होता है कि प्रक्रिया को छिपाकर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है.

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नगर पंचायत द्वारा योजनाओं और विकास कार्यों पर खर्च किए जा रहे सरकारी धन की प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य है. यदि प्रक्रिया में अनियमितता साबित होती है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

अब नजर जिला प्रशासन पर है कि वह इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और क्या मामले की जांच होगी या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. यह विवाद अगले कुछ दिनों तक दोरनापाल की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है.

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