जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज सर्व समाज और बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर के तत्वावधान में एक विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर में हुई हालिया चोरी की घटना और प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में किया गया. शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए.

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सुशील मौर्य ने कहा कि मां दंतेश्वरी मंदिर पूरे क्षेत्र की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है और मंदिर परिसर में चोरी की घटना होना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है. वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार्य नहीं है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए ताकि लोगों की आस्था और सुरक्षा का विश्वास बना रहे.

​इसके साथ ही, प्रदर्शन के दौरान प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य जी के साथ हुई घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया गया. कांग्रेस नेताओं ने इसे सनातन धर्म की सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्ता का अपमान करार दिया. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है, अतः उनके सम्मान की रक्षा करना शासन का कर्तव्य है. वक्ताओं ने मांग की कि इस मामले में जिम्मेदार पक्षों को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

​विरोध प्रदर्शन के अंत में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने नायब तहसीलदार डोमन लाल के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा. इस ज्ञापन में मंदिर चोरी के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने और धार्मिक गुरुओं के सम्मान की रक्षा हेतु उचित कार्यवाही की मांग की गई है. इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रमुखों सहित वरिष्ठ कांग्रेसियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे और भी उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे. इस अवसर पर ब्राह्मण, बंगीय, यादव, मसीह, निषाद, क्षत्रिय, मुस्लिम और मैथिली समाज सहित कई अन्य वर्गों के लोगों ने उपस्थित रहकर अपना समर्थन दर्ज कराया.

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