जगदलपुर (डेस्क) – विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में बस्तर की मेधा ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है! जिले के होनहार छात्र वीरेंद्र यादव का प्रतिष्ठित 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 के लिए चयन हुआ है. भोपाल (मध्य प्रदेश) में 18 से 23 नवंबर तक आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर, वीरेंद्र बस्तर जोन का गौरवशाली प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

“प्लास्टिक से जैव ईंधन” – पर्यावरण के लिए क्रांतिकारी मॉडल

​वीरेंद्र यादव का मॉडल एक बेहद सामयिक और महत्वपूर्ण विषय, ‘अपशिष्ट प्रबंधन’ पर केंद्रित है. उनके अभिनव प्रदर्श “प्लास्टिक कचरे से जैव ईंधन एवं ऊर्जा उत्पादन” ने निर्णायक मंडल को खासा प्रभावित किया है. यह मॉडल न सिर्फ खतरनाक प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन का रास्ता दिखाता है, बल्कि उसे उपयोगी जैव ईंधन और ऊर्जा में बदलकर एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल समाधान भी प्रस्तुत करता है. ​यह उपलब्धि केवल वीरेंद्र की नहीं, बल्कि उनके मार्गदर्शक शिक्षक अंकित गुप्ता के सतत मार्गदर्शन और बस्तर के समूचे विज्ञान समुदाय की मेहनत का परिणाम है.

लगातार राष्ट्रीय मंच पर बस्तर के जलवा 

​वीरेंद्र की यह सफलता कोई इकलौती घटना नहीं है. विज्ञान गतिविधियों के अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि बस्तर जोन लगातार कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतियोगिताओं में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है.

​हाल ही में, जशपुर में आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में भी बस्तर जोन के 7 छात्रों ने विशिष्ट स्थान प्राप्त कर जिले की वैज्ञानिक प्रतिभा को प्रमाणित किया था. जिले के विज्ञान शिक्षकों की लगन और छात्रों की मेहनत ही इस शानदार प्रदर्शन का आधार है.

प्रशासन ने दी बधाई, प्रोत्साहन से मिला मार्गदर्शन

​जिले के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों ने वीरेंद्र की उपलब्धि पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की और उन्हें बधाई दी है. कलेक्टर हरिस एस. और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन ने विज्ञान के विकास और छात्रों के प्रोत्साहन में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया है.

​इस शानदार प्रदर्शन में जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल, जिला मिशन समन्वयक अशोक पांडे, नोडल अधिकारी बी.एस. रामकुमार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता, एपीसी जयनारायण पाणिग्रही, राकेश खापर्डे तथा मार्गदर्शक शिक्षक दीप्ति ठाकुर, सचिन कारेकर, मनीष कुमार अहीर सहित सभी विज्ञान शिक्षकों का भी अतुलनीय योगदान रहा है.

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