जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर संभाग के जगदलपुर मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कोलावाड़ा ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल की है. पेसा कानून के तहत गठित ग्राम स्तरीय शिक्षा समिति ने न केवल बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी है, बल्कि पूरे गांव में नशा मुक्ति, स्वास्थ्य और स्वच्छता की अलख जगाई है.

संकल्प से साधन : युवाओं ने जुटाया चंदा
कोलावाड़ा गांव की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अब तक कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं जा पाया था. इस स्थिति को बदलने का संकल्प लेते हुए, गांव के युवाओं और समिति सदस्यों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया. उन्होंने अपने सामर्थ्य के अनुसार ₹6,050/- की राशि एकत्र की, जिसमें नौ लोगों का व्यक्तिगत योगदान और साझा सहयोग शामिल था.
इस राशि से, समिति ने ₹7,050/- मूल्य की अध्ययन सामग्री खरीदी, जिसमें व्हाइट बोर्ड, पेन, कॉपी और पहाड़ा चार्ट शामिल थे.

ज्ञान की रोशनी : हर पारा में ट्यूशन और लाइट
शिक्षा समिति ने गांव के तीन अलग-अलग पारा (मोहल्लों) में 1 से 8वीं कक्षा के बच्चों के लिए निःशुल्क ट्यूशन कक्षाएं शुरू की हैं. इसका सबसे अनूठा पहलू यह है कि गांव के ही शिक्षित युवा स्वयंसेवक इन बच्चों को निःशुल्क पढ़ा रहे हैं.
विशेष रूप से, समिति ने प्रत्येक पारा में बल्ब, तार और होल्डर लगाकर लाइट की सुविधा सुनिश्चित की है, ताकि बच्चे शाम के समय भी बिना किसी परेशानी के पढ़ाई कर सकें. इस पहल ने कोलावाड़ा गांव की शाम को “ज्ञान की रौशनी” से भर दिया है.
शिक्षा समिति : एक सशक्त निगरानी तंत्र
समिति का उद्देश्य केवल ट्यूशन देना नहीं है, बल्कि सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना है. समिति के मुख्य कार्य हैं:
ड्राप आउट पर लगाम : स्कूल से अनुपस्थित बच्चों के घर जाकर उन्हें स्कूल लौटने के लिए प्रेरित करना.
सामाजिक सुधार : नशा मुक्ति, स्वच्छता और मलेरिया नियंत्रण पर लगातार जागरूकता अभियान चलाना.
प्रोत्साहन : अगले सत्र में फर्स्ट डिवीजन लाने वाले बच्चों को ग्राम सभा और समिति की ओर से विशेष प्रोत्साहन इनाम दिया जाएगा.
सामग्री वितरण कार्यक्रम में सरपंच, ग्राम सभा अध्यक्ष, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. समिति ने बच्चों को अध्ययन सामग्री वितरित की और शिक्षा के लिए निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया.

कोलावाड़ा की यह पहल दिखाती है कि जब स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक शक्ति एकजुट होती है, तो किसी भी चुनौती को बदला जा सकता है. यह गांव अब सरकारी नौकरी के लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है.